मप्र में बढ़ रहा महिला अपराधों का ग्राफ:15 जिलों में महिला पुलिस अफसर एक फीसदी भी नहीं

मप्र में बढ़ रहा महिला अपराधों का ग्राफ, 15 जिलों में महिला पुलिस अफसर एक फीसदी भी नहीं
बढ़ते अपराध… 18.63 फीसदी के साथ इंदौर संभाग पहले और 12.71 फीसदी के साथ भोपाल दूसरे नंबर पर
विशेष संवाददाता | भोपाल
महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर मप्र लंबे समय से बदनाम है। ऐसे अपराध रोकने के लिए सरकार और पुलिस के स्तर पर तमाम कदम भी उठाए गए लेकिन ये कारगर नहीं हो पाए। 2023 में महिला अपराधों के 32,342 मामले सामने आए थे। 2024 में ये आंकड़ा 33,203 पर पहुंच गया। इसकी बड़ी वजह महिला पुलिस अफसरों (डीएसपी से लेकर एएसआई) की कमी है। पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा के आंकड़े बताते हैं कि 15 जिलों में महिला पुलिस अधिकारी (मैदानी अमला) एक फीसदी भी नहीं है। यही वजह है कि निर्भया मोबाइल वैन गायब हो गईं तो स्कूल-कॉलेज के पास पुलिस बूथ खाली पड़े हैं। जोर-शोर से शुरू हुई ऊर्जा डेस्क काम के बोझ से कराह रही है।

पिछले कुछ सालों में महिला अपराध रोकने के लिए शुरू हुए अभियान और हकीकत Áऊर्जा महिला हेल्प डेस्क : 31 मार्च 2021 को शुरुआत। अभी थानों में 987 डेस्क संचालित हैं। इनमें 751 महिला अधिकारी पदस्थ हैं। डेस्क में अब तक 74,411 अपराध दर्ज किए गए। 57,880 शिकायतों का निराकरण किया गया।
हकीकत : बल की कमी बाधा बन गई है। अधिकतर महिला सब इंस्पेक्टर पर 4-4 थानों का लोड है।
Áनिर्भया फंड: मप्र को करीब 15 करोड़ रुपए इस फंड से मिले हैं। सुरक्षा और पीड़िताओं की सहायता पर खर्च होना थे।
-हकीकत: महिला अपराधों में तत्काल मदद के लिए इस फंड से 250 स्कूटी खरीदी गईं। ऊर्जा डेस्क का स्टाफ इनका उपयोग करता है। हालांकि जिस तरह के रिस्पांस की जरूरत थी, वैसा नहीं मिल रहा है। पिछले 2 साल से मप्र को फंड ही नहीं मिला है।
Áपैनिक बटन: पब्लिक व्हीकल में महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन लगाना थे।
हकीकत- अधिकतर वाहनों में लगे पैनिक बटन काम ही नहीं करते। कई वाहनों में डमी बटन लगाए गए हैं।
Áहम होंगे कामयाब: 24 विभागों के सहयोग से संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए। ऐसी जगह सादा कपड़ों में पुलिस बल, निर्भया मोबाइल वैन की तैनाती हुई। कोचिंग-कॉलेजों के पास पुलिस बूथ बनाए गए।
हकी​कत : अब ज्यादातर जगह ये बूथ खाली दिखाई देते हैं। निर्भया मोबाइल वैन सड़कों से गायब है।
अभिमन्यु अभियान: लड़कों को महिला संबंधी अपराधों के प्रति जागरूक करने के मकसद से प्रदेशभर में 50 हजार प्रश्नावली स्कूल, कॉलेज में बांटी गई।
हकीकत : अभियान खानापूर्ति जैसा ही रहा।
संभाग महिला प्रतिशत महिला अफसरों
अपराध का प्रतिशत
भोपाल (ग्रामीण) 2583 7.78% 4.78%
भोपाल (नगरीय) 1638 4.93 6.49%
इंदौर (ग्रामीण) 4196 12.64% 11.0%
इंदौर (नगरीय) 1878 5.66% 7.30%
ग्वालियर 2851 8.59% 11.09%
उज्जैन 3885 11.70% 11.36%
जबलपुर 3453 10.40% 12.44%
रीवा 3053 9.19% 6.04%
शहडोल 1280 3.86% 2.25%
चंबल 1314 3.96% 6.04%
सागर 3558 10.72% 10.55%
नर्मदापुरम 2172 6.54% 5.86%
बालाघाट 1342 4.04% 4.78%
(अपराध वर्ष 2024 के, मैदानी अमले की पदस्थापना जुलाई-2025 के अनुसार।) दुष्कर्म के आंकड़ों में भ्रम… एनसीआरबी, वा​र्षिक प्रतिवेदन और विधानसभा हर जगह अलग संख्या … और गृह विभाग का ये जवाब
यह कहना सही नहीं है कि एनसीआरबी की रिपोर्ट, वार्षिक प्रतिवेदन और विधानसभा में दी गई जानकारी अलग-अलग है। वार्षिक प्रतिवेदन में प्रत्येक माह में पंजीबद्ध अपराधों की एकजाई जानकारी दी जाती है। जबकि, विधानसभा के सवालों के लिए जिलों से जानकारी मांगी जाती है, वो उस समय की स्थिति में होती है। अपहरण के मामलों में पीड़िताओं की बरामदगी के बाद दुष्कर्म की पुष्टि होती है तो इसकी धारा बढ़ाई जाती है। वहीं जांच में दुष्कर्म की पुष्टि न होने पर ये धारा हटा दी जाती है। कई बार अपहरण ही साबित नहीं होता। इसलिए अपहरण एवं दुष्कर्म के प्रकरणों में कमी-वृद्धि संभव है। अध्ययन कर बता पाएंगे…अलग-अलग जानकारी सामने आने की जो बात है, वह दरअसल उस वक्त की स्थिति की जानकारी दी जाती है। इस बारे में बाकी अध्ययन कर बताया जा सकेगा। जयदीप प्रसाद, एडीजी, स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो

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