पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि मैंने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। ममता ने चुनाव से ठीक पहले SIR कराए जाने की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि घुसपैठ की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। ममता बनर्जी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये बातें कही। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके पीछे कई लोग बैठे दिखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी SIR के पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि वह चाहतीं तो लाखों लोगों को दिल्ली ला सकती थीं, लेकिन ये लोग पिछले छह-सात दिनों से यहां रुके हुए हैं। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि चुनाव के ठीक पहले SIR क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फरवरी में ही चुनाव की अधिसूचना आने की संभावना है। ऐसे में बिना प्लानिंग, बिना मैपिंग, बिना ट्रेनिंग और बिना इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्या 2–3 महीने में यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है? ममता बनर्जी की 5 बड़ी बाते… अभिषेक बनर्जी बोले- मुख्य चुनाव आयुक्त ने पत्र का जवाब नहीं दिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपने ही दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया है। एक राज्य की मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त को छह पत्र लिखे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं दिया गया। ऐसे में सवाल यह है कि असल में बदतमीजी कौन कर रहा है। 2 फरवरी: ममता काली शॉल ओढ़कर मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलीं ममता बनर्जी ने सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ काली शॉल ओढ़कर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी। उनके साथ SIR प्रभावित 13 परिवार और TMC के नेता भी थे। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि ममता ने अपने मुद्दे CEC को बताए लेकिन उनका जवाब सुने बिना ही नाराज होकर चली गईं। मुलाकात के बाद ममता ने कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। मैं दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हूं। मैंने आज तक ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त नहीं देखा। वह इस तरह से बात करते हैं जैसे वह जमींदार हों और हम नौकर। पूरी खबर पढ़ें… ————— ये खबर भी पढ़ें… ममता बोलीं-SIR की चिंता में बंगाल में रोज 4 आत्महत्याएं:110 से ज्यादा लोगों की मौत हुई; चुनाव आयोग और केंद्र सरकार जिम्मेदार पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कहा कि बंगाल में SIR की चिंता में हर रोज 3 से 4 लोग आत्महत्या कर रहे हैं। अब तक 110 से ज्यादा लोग मर चुके हैं। 40-45 लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इतने साल बाद क्या हमें यह साबित करना पड़ेगा कि हम इस देश के नागरिक हैं? पूरी खबर पढ़ें…


