अजरबैजान से प्रत्यर्पित कर लाए गए कुख्यात अपराधी सुनील कुमार मीणा उर्फ मयंक सिंह से बुधवार को झारखंड एटीएस ने धुर्वा स्थित मुख्यालय में करीब 6 घंटे तक पूछताछ की। पूछताछ के शुरुआती दौर में मयंक ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर बाद सामान्य ढंग से बातचीत करने लगा। इस दौरान उसने न केवल लॉरेंस विश्नोई गैंग से संपर्क होने की बात स्वीकार की, बल्कि यह भी खुलासा किया कि वह लंबे समय से अमन साहु गैंग के लिए भी काम कर रहा था। मयंक ने माना कि उसी ने अमन साहु का संपर्क लॉरेंस विश्नोई से कराया था। इसके बाद अमन साहु लगातार लॉरेंस को शूटर उपलब्ध कराने लगा और बदले में लॉरेंस उसके गिरोह को अत्याधुनिक हथियार मुहैया कराता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मयंक दोनों गैंग के फाइनेंसियल नेटवर्क को भी संभालता था। अब एटीएस की कोशिश है कि उसकी रिमांड अवधि में इस नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जाए ताकि गैंग को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके। बता दें कि एटीएस ने मयंक को 6 दिन की रिमांड पर लिया है। इस दौरान पुलिस का फोकस उसके जरिए अमन साहु और लॉरेंस विश्नोई गैंग के नेटवर्क को पूरी तरह खंगालने पर है। माना जा रहा है कि मयंक से मिले इनपुट के आधार पर कई नए अपराधियों और हथियार सप्लायरों तक पुलिस की पहुंच सकती है। एटीएस के सामने मुस्कुराता रहा, खाना खाने से इंकार कर दिया पूछताछ के दौरान मयंक का रवैया निडर दिखाई दिया। वह एटीएस अधिकारियों के सवालों का मुस्कुराते हुए जवाब देता रहा। सुबह रामगढ़ जेल से नाश्ता करने के बाद जब उसे रांची स्थित एटीएस मुख्यालय लाया गया तो दोपहर में उसने भोजन करने से इंकार कर दिया। पूछने पर उसने कहा कि वह केवल रात में ही खाना खाएगा। झारखंड और बिहार समेत कई राज्यों में 50 से अधिक केस दर्ज मयंक पर झारखंड, बिहार, राजस्थान और पंजाब में 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों गैंग के लिए हथियार सप्लाई कराने की जिम्मेदारी भी उसी पर थी। हथियार सप्लायर से उसके सीधे संपर्क रहे हैं। एटीएस अब पूछताछ के जरिए यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन सप्लायरों का नेटवर्क कितना बड़ा है और कहां-कहां फैला हुआ है।


