एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े जेके लोन अस्पताल में इलाज के लिए आने वालों के लिए राहत वाली खबर है। थैलेसीमिया और हिमोफीलिया बीमारी से पीड़ित बच्चों को आने वाले दिनों में बेड के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। अस्पताल के नेफ्रोलॉजी वार्ड की छत पर एक करोड़ रुपए की लागत से 40 बेड का डे-केयर वार्ड अगले चार माह में बन जाएगा। अस्पताल में बनने वाले डे-केयर वार्ड बनाने के लिए सरकार की ओर से अनुमति मिल चुकी है। वार्ड सीएसआर फंड के तहत रोटरी क्लब बनवाएगा। बच्चों को बेड मिलना आसान जेके लोन में रोजाना ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए थैलेसीमिया के 35 से 40 और हिमोफीलिया के फेक्टर के लिए 10 से 15 मरीज आते है। ये सुबह आकर शाम तक प्रोसेस होने के बाद चले जाते है। मौजूदा स्थिति में जेके लोन में करीबन 15 बैड है। जिसके कारण इन्हे परेशानी का सामना करना पड़ता है। डे-केयर वार्ड बनने के बाद न केवल बैड मिलना बल्कि इलाज भी आसान होगा। “सरकार की ओर से एनजीओ के जरिए डे-केयर वार्ड बनाने की अनुमति मिल चुकी है। अगले चार माह में बनकर पूरा हो जाएगा। मौजूदा स्थिति में बेड कम होने के कारण थैलेसीमिया और हिमोफीलिया से पीड़ित बच्चों को परेशानी होती है।”
-डॉ. आरएन सेहरा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल


