एसएमएस अस्पताल पर मरीजों का भार कम करने, ऑपरेशन की वेटिंग को कम करने और विश्व स्तरीय इलाज की सुविधा देने के लिए प्रताप नगर में बना आरयूएचएस अस्पताल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहा है। सीएम भजनलाल शर्मा का एम्स की तर्ज पर रिम्स बनने का सपना कब पूरा होगा। करोड़ों की लागत से बने एक हजार बैड वाले आरयूएचएस अस्पताल में 700 सामान्य और 250 आईसीयू बैड शामिल है। मौजूदा स्थिति में न केवल जनरल वार्ड बल्कि आईसीयू में भी बैड खाली पड़े है। इसी माह में 22 दिसंबर को 86 और 24 दिसंबर को 80 मरीज भर्ती हुए है। ऐसे में लग रहा है जैसे रिम्स कागजों में दौड़ रहा है। आरयूएचएस के डॉक्टरों की टीम एम्स जोधपुर व दिल्ली का दौरा भी करेगी और इलाज की व्यवस्था देखेगी। योजना को मूर्त रुप देने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी का गठन किया गया है। रिम्स के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती का काम प्रारंभ कर दिया गया है। अब सवाल उठता है कि आरयूएचएस आखिर कब मरीजों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा। कोरोना के दौरान मरीजों को बैड नहीं मिल रहे थे सरकार की ओर से आरयूएचएस अस्पताल को कोविड महामारी के दौरान डेडिकेटेड कोविड सेन्टर बनाने के बाद मरीजों को को बैड नहीं मिल रहे थे। लेकिन मौजूदा स्थिति में जनरल वार्ड और आईसीयू खाली पड़े है। वो मरीजों के आने का इंतजार कर रहे थे। ये हैं प्रमुख कारण किस चरण में कितना खर्च प्रथम चरण – 200 करोड़ सुपरस्पेशलिटी में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, यूरोलोजी, रीनल ट्रांसप्लांट, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, सीटीवीएस , ट्रांसफ्यूजन मेडिसन दूसरा चरण – 400 करोड़ -सुपरस्पेशलिटी ब्लॉक, पेराप्लेजिक विंग, नवीन एकेडेमिक ब्लॉक, अस्पताल के भवन का विस्तार तीसरा चरण – 150 करोड़ क्रिटिकल केयर ब्लॉक, इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रोपिकल मेडिसन एंड वायरलोजी माह आउटडोर इनडोर जनवरी 26127 273 फरवरी 35072 302 मार्च 36582 320 अप्रैल 34062 351 मई 36384 392 जून 33411 352 जुलाई 40627 429 अगस्त 39982 489 सितंबर 54252 715 अक्टूबर 45518 720 नवंबर 42011 501 (आंकड़े सिर्फ आरयूएचएस अस्पताल के वर्ष-2024 के है) क्या कहते है जिम्मेदार मरीजों को एम्स दिल्ली जैसी सुविधा रिम्स जयपुर में मिल सकेगी। सीएम की ऐसी मंशा है कि यहां पर आने वाले मरीजों को आउटडोर, जांच सुविधा, इनडोर और सर्जरी के लिए एसएमएस नहीं जाना पड़े। आरयूएचएस अस्पताल को एम्स की तर्ज पर रिम्स में तब्दील किया जा रहा है। चरणबद्ध तरीके से 750 करोड़ रुपए खर्च होंगे। -डॉ.धनन्जय अग्रवाल, कुलपति, आरयूएचएस फैकल्टी के पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। और पदों की भर्ती के बाद मरीजों को ब्राड व सुपरस्पेशलिटी की सुविधा भी मिल सकेगी। -डॉ.विनोद जोशी, प्राचार्य, आरयूएचएस कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज हम सीएम के सपने को पूरा करने का हर संभव प्रयास कर रहे है। कुछ बैड ही खाली है। -डॉ.महेन्द्र कुमार बैनाड़ा, अधीक्षक, आरयूएचएस अस्पताल रिम्स में तब्दील होने पर मरीजों को एम्स दिल्ली व जोधपुर नहीं जाना पड़ेगा, एसएमएस पर मरीजों का भार कम होगा


