राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति विकास परिषद द्वारा भोपाल में आयोजित सामाजिक न्याय सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चुनावी व्यवस्था, लोकतंत्र और संविधान को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का लोकतंत्र तभी बचेगा, जब चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएंगे, क्योंकि मशीन आधारित चुनावों में जनता का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है। पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि विधायक और सांसद मशीनों से चुने जाएंगे, तो फिर किसी भी पार्टी का निचला कार्यकर्ता, गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक अपनी बात किससे कहेगा। ‘मशीन से चुनी सरकार जनता से नहीं जुड़ेगी’
जीतू पटवारी ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव का नाम नहीं है, बल्कि जनता और जनप्रतिनिधि के बीच भरोसे का रिश्ता है। उन्होंने कहा- जिस दिन विधायक और सांसद मशीनों से चुने जाएंगे, उस दिन जनप्रतिनिधि आम आदमी से कट जाएंगे। मशीन किसी की पीड़ा नहीं समझती, न ही वह समाज के कमजोर वर्ग की आवाज बन सकती है। “दुनिया बैलेट से चुनाव करती है, भारत में मशीन क्यों?”
पटवारी ने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा कि- “अमेरिका, यूरोप और गल्फ देशों में आज भी बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं। दुनिया में कहीं भी इतनी बड़ी आबादी वाले देश में मशीन से चुनाव नहीं होता। केवल भारत में ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मशीन आधारित चुनावों में हेरफेर की आशंका हमेशा बनी रहती है, जिससे लोकतंत्र कमजोर होता है। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप, SIR को बनाया हथियार
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि चुनाव आचार संहिता लगने से पहले वोटर लिस्ट फ्रीज नहीं की जाती, जिससे आखिरी समय तक वोटर लिस्ट में हेरफेर की जाती है।उन्होंने दावा किया कि, मध्यप्रदेश में एसआईआर (Special Intensive Revision) के नाम पर करीब 50 लाख वोट घटाए गए। इनमें अधिकांश वोट एससी, एसटी, अल्पसंख्यक, अति पिछड़े और घुमक्कड़ समुदायों के हैं। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस 32 लाख वोटों से चुनाव हारी, जबकि इससे कहीं ज्यादा वोट सूची से गायब हुए। “प्रधानमंत्री भी आम वोट से चुना जाए, तभी पद का सम्मान रहेगा”
पटवारी ने कहा कि देश का प्रधानमंत्री किसी भी पार्टी का हो सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री आम नागरिक के वोट से चुना जाएगा, तभी उस पद का सम्मान रहेगा। अगर आत्मा में लोकतंत्र नहीं होगा और केवल पद बचा रहेगा, तो वह देश के लिए उपयोगी नहीं होगा। एससी-एसटी समाज की पीड़ा उठाई
सम्मेलन में सामाजिक न्याय पर बात करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि हम एससी-एसटी समाज से आते हैं। हमारे पूर्वजों ने भयानक यातनाएं सही हैं और आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में छुआछूत जैसी समस्याएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भेदभाव केवल अशिक्षित समाज में नहीं, बल्कि शिक्षित वर्ग और प्रशासनिक तंत्र में भी मौजूद है।एससी-एसटी वर्ग से आने वाले अधिकारियों को भी कई बार मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न झेलना पड़ता है। “अगर अब नहीं जागे तो लड़ने की ताकत भी नहीं बचेगी”
जीतू पटवारी ने चेतावनी देते हुए कहा- “अगर आप लोग नहीं जागे, तो देखते ही देखते इतना नकारात्मक परिवर्तन होगा कि फिर आप चाहकर भी लड़ नहीं पाएंगे।” उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एकदलीय व्यवस्था है, मीडिया सरकारी है और आम आदमी की आवाज दबा दी जाती है।भारत को उस रास्ते पर जाने से रोकने के लिए संविधान और लोकतंत्र की रक्षा जरूरी है। “संविधान बचाने के लिए संगठित होना जरूरी”
अपने संबोधन के अंत में पटवारी ने कहा कि “अगर अपनी आजादी और अधिकार भावी पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना है, तो संगठित होना पड़ेगा। देश, संविधान और वोट तीनों संकट में हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की है जो लोकतंत्र में भरोसा रखता है। ये खबर भी पढ़ें… आदिवासी बस्ती हटाने के नोटिस पर भड़के पीसीसी चीफ पीसीसी चीफ जीतू पटवारी भोपाल के मानस भवन में सामाजिक न्याय सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे थे। यहां मानस भवन से लगी आदिवासियों की झुग्गी बस्ती की महिलाएं नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के साथ पटवारी से मिलने पहुंची। आदिवासी बस्ती की महिलाओं ने जीतू पटवारी से कहा कि करीब 60-70 साल से हम लोग यहीं पीछे झुग्गी बस्ती में रहते आए हैं।पूरी खबर पढ़ें


