उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। पर्व के तीसरे दिन रविवार को बाबा महाकाल ने अपने भक्तों को माता पार्वती के साथ शेषनाग स्वरूप में दर्शन दिए। आगामी सात दिनों तक बाबा महाकाल विभिन्न स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देते रहेंगे। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल मंदिर में शिव नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस वर्ष नवरात्रि दस दिनों की है, जिसके चलते दो दिन भांग से श्रृंगार कर वस्त्र धारण कराए गए। रविवार को महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के मार्गदर्शन में 11 ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल का पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक संपन्न कराया। अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को केसर मिश्रित चंदन का लेप लगाया गया। जलाधारी पर अबीर, गुलाल, कुमकुम, हल्दी और मेहंदी सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई। शाम को बाबा महाकाल का शेषनाग स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें माता पार्वती को उनके मस्तिष्क पर विराजित किया गया। यह विशेष श्रृंगार क्रम 14 फरवरी तक जारी रहेगा। महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि शिव नवरात्रि में बाबा का प्रतिदिन अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार किया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने निवास के लिए ॐ पर्वत की रचना की थी, यही कारण है कि आज भगवान शिव शेषनाग स्वरूप में दर्शन दे रहे हैं, जबकि माता पार्वती गिरजा स्वरूप में उनके मस्तिष्क पर विराजित हैं। तीन दिन के इस श्रृंगार क्रम के बाद सोमवार को बाबा का घटाटोप स्वरूप में श्रृंगार किया जाएगा। मान्यता है कि कोटितीर्थ कुंड का धार्मिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि इसे ब्रह्मांड के सभी जल तीर्थों का संकलन माना जाता है। इसी पवित्र जल से बाबा महाकाल का प्रतिदिन जलाभिषेक होता है। पर्व की शुरुआत कोटितीर्थ कुंड के प्रधान देवता कोटेश्वर महादेव के पूजन से की जाती है और प्रतिदिन उनकी विशेष पूजा होती है।


