महानदी-इंद्रावती के नाम हो सकते हैं नौसैनिक पोत के नाम:जल्द सैनिक भर्ती रैली भी होगी, सीएम साय ने की केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मांग

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर सौजन्य मुलाकात की। बैठक में बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार, राज्य में रक्षा उद्योग के विकास, सेना भर्ती रैलियों के आयोजन जैसे कई मुद्दों पर विस्तार चर्चा हुई है। इसके अलावा सीएम साय ने नौसैनिक पोतों के नामकरण इंद्रावती, महानदी नदियों के नाम पर रखने की मांग भी है। इस दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह भी मौजूद रहे। बिलासपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए रक्षा मंत्रालय की भूमि मांगी मुख्यमंत्री ने बैठक में बताया कि बिलासपुर में रक्षा मंत्रालय की भूमि स्थित है। उन्होंने अनुरोध किया कि इस भूमि को एयरपोर्ट विस्तार के लिए राज्य सरकार को उपलब्ध कराया जाए।साय ने कहा कि एयर कनेक्टिविटी बेहतर होने से प्रदेश के औद्योगिक और रणनीतिक विकास को नई गति मिलेगी। छत्तीसगढ़ में रक्षा क्षेत्र के विकास पर फोकस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की नई औद्योगिक नीति की जानकारी दी, जिसके तहत रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को विशेष प्रोत्साहन देने की योजना है। उन्होंने कहा — “यह नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप है। इससे उच्च तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान और निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।” प्रदेश में विशेष सेना भर्ती रैलियों की मांग मुख्यमंत्री साय ने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ में युवाओं के लिए विशेष सेना भर्ती रैलियां आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा — “हमारे प्रदेश के युवाओं में अनुशासन, शारीरिक क्षमता और देशभक्ति की भावना प्रबल है। उन्हें अपने ही प्रदेश में देश सेवा का अवसर मिलना चाहिए।” INS इंद्रावती और INS महानदी नाम के सुझाव मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य की सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की नदियां — इंद्रावती, महानदी — केवल जलस्रोत नहीं, बल्कि प्रदेश की आत्मा हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि जब भी रक्षा मंत्रालय नए नौसैनिक पोत लॉन्च करे, तो उनका नाम INS इंद्रावती, INS महानदी या INS बस्तर जैसे रखा जाए। “यह न केवल प्रतीकात्मक रूप से सुंदर होगा बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव दिलाएगा”।

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