लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ होगी। पूजा की शुरुआत में मात्र 18 दिन बचे हैं। लेकिन शहर के छठ घाटों की स्थिति देखकर छठ पूजा समिति के सदस्यों सहित व्रतियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। क्योंकि, शहर में करीब 100 घाटों पर लाखों छठ व्रती अर्घ्य देने पहुंचते हैं। इसमें 72 तालाब हैं। सभी तालाब लबालब भरे हुए हैं। डैम भी डेंजर जोन में है। दरअसल, रांची में इस बार रिकॉर्ड तोड़ 1550 एमएम बारिश हुई है। बारिश होने से तालाब भरे हुए हैं। सीढ़ी तक पानी पहुंच गया है। घाटों पर फिसलन भी है। इस वजह से पूजा समिति के सदस्य काफी परेशान हैं। समितियों की मांगों पर निगम प्रशासक सुशांत गौरव ने मंगलवार को मधुकम तालाब की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तालाब की सीढ़ी, रेलिंग को दुरूस्त करने, रंग-रोगन कराने और तालाब से कचरा साफ कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि तालाब के किनारे जमा गाद और कचरा को निकालने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू करें। डेंजर जाने वाले क्षेत्र को बैरिकेडिंग करें, ताकि व्रती निर्धारित क्षेत्र से आगे नहीं बढ़े। ऐसी स्थिति सिर्फ मधुकम तालाब की ही नहीं है। शहर के लगभग सभी प्रमुख तालाबों का यही हाल है। अरगोड़ा, चडरी, नायक, बनस और दिव्यायन तालाब में सीढ़ी से उतरते ही 6 फीट गहरा पानी है। ऐसे में बड़ा सवाल है, व्रती कैसे अर्घ्य देंगे। भास्कर ने की छठ घाटों की पड़ताल : प्रमुख तालाबों की सीढ़ियां डूबी हुईं, बढ़ाई जाएगी सुरक्षा दिव्यायन तालाब : डेंजर जोन में दिव्यायन तालाब भी इस बार डेंजर जोन में है। क्योंकि, सीढ़ी तक पानी पहुंचा हुआ है। सीढ़ी से नीचे उतरने पर करीब पांच फीट पानी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि दिव्यायन तालाब में पहली बार इतना अधिक पानी भरा है। नायक तालाब : नीचे गहरा गड्ढा चुटिया स्थित नायक तालाब की स्थिति और अधिक खराब है। यहां पर भी सीढ़ी के ऊपर पानी चढ़ा हुआ है। सीढ़ी पर करीब तीन फीट तक पानी भरा हुआ है। इससे नीचे गहरा गड्ढा है। यहां भी बांस डालने पर करीब पांच फीट पानी मिला। जेल तालाब : 4 फीट तक पानी जेल तालाब भी भरा हुआ है। तालाब में मिट्टी भरे होने से सीढ़ी के आगे तक चार फीट पानी है। मौके पर मछली पकड़ने वाले मछुआरे ने बताया कि सीढ़ी के तीन फीट आगे तक बैरिकेडिंग होने से इस तालाब में व्रतियों को अधिक दिक्कत नहीं होगी। अरगोड़ा तालाब : यहां बैरिकेडिंग के अंदर ही पानी का स्तर खतरनाक तालाब के दो तरफ सीढ़ी बनी हुई है। अन्य हिस्से में सीढ़ी बनना था, लेकिन बोल्डर गिराकर छोड़ दिया गया है। क्योंकि, नगर निगम ने ठेकेदार को पेमेंट नहीं किया तो काम बंद कर दिया गया है। सूर्य मंदिर के सामने वाले हिस्से में तालाब में बैरिकेडिंग की गई है। लेकिन बैरिकेडिंग के अंदर ही डेंजर जोन है। बनस तालाब : सीढ़ी से नीचे 7 फीट गहरा गड्ढा बहु बाजार स्थिति बनस तालाब भी डेंजर जोन में है। यहां भी चार सीढ़ी पहले तक करीब चार फीट पानी भरा हुआ है। अंतिम सीढ़ी से नीचे करीब सात फीट गहरा गड्ढा है। सीढ़ी पर काफी फिसलन है। सीढ़ी पर भी अर्घ्य देने के लिए व्रती जुटते हैं और गलती से पैर फिसल गया तो वे सीधे गहरे पानी में जाएंगे। पूजा समिति के सदस्यों ने कहा कि इस बार इतना अधिक पानी है कि यहां चारों ओर बैरिकेडिंग की जरुरत होगी। एनडीआरएफ की तैनाती जरुरी है। चडरी तालाब : यहां सीढ़ी से नीचे उतरना खतरे से खाली नहीं तालाब के चारों ओर सीढ़ी बनी हुई है। इसके बावजूद यह खतरनाक है। सीढ़ी तक पानी चढ़ा हुआ है। व्रतियों को सीढ़ी पर ही खड़ा होकर अर्घ्य देना होगा। सीढ़ी से नीचे उतरना खतरे से खाली नहीं है। सीढ़ी से नीचे बांस डाल कर पानी मापा गया तो बांस छह फीट नीचे चला गया। मौके पर मोलू मुंडा ने बताया कि बैरिकेडिंग के साथ एनडीआरएफ की तैनाती नहीं हुई तो लोगों को दिक्कत होगी।


