प्रयागराज महाकुंभ में महामंडलेश्वर की पदवी पाकर अपने निवाई स्थित हरभावता स्थित आश्रम लौट रहे बालकानंद महाराज के स्वागत के लिए पलक-पावड़ें बिछा दिए। सुबह साढ़े ग्यारह बजे महामंडलेश्वर बालकनंद महाराज जयपुर के शिवदास टोल प्लाजा पहुंचे। वहां उनके भक्तों ने उनका फूल बरसाकर स्वागत किया। स्वागत करने वालों में गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष विजय बैंसला समेत सैकड़ों भक्त मौजूद रहे। टोल प्लाजा से उन्हें बग्गी में बिठाया गया। टोल प्लाजा के बाद दोपहर करीब 12 बजे चाकसू पहुंचे। यहां भी सैकड़ों लोग उनके स्वागत में उमड़ पड़े। लोग उनका जोरदार स्वागत किया। चाकसू में महामंडलेश्वर बालकानद महाराज का स्वागत कर उनका आशीर्वाद लेने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। उनके दर्शन करने के लिए भक्तों ने उन्हें घेर लिया। इस दौरान जमकर महामंडलेश्वर महाराज समेत धार्मिक जयकारों से चाकसू धर्ममयी बन गया। हालांकि इस दौरान यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। उनके स्वागत किए जगह जगह रोड किनारे कट आउट, बैनर, होर्डिंग लगाए गए। दोपहर बाद महामंडलेश्वर के आश्रम पहुंचने पर उनके दर्शन के लिए कार्यक्रम रखा है। जहां करीब आठ दस भक्तों के आने की संभावना है। उनके लिए प्रसादी भी बनाई है। ज्ञात रहे कि बालकनंद महाराज को 23 जनवरी को उनके लोक कल्याण को लेकर 30 साल से हरभावता आश्रम में किय जा रहे कार्यों के चलते उन्हें प्रयागराज महाकुंभ में महामंडलेश्वर की पदवी दी गई है। वे साल 1995 में संत बने थे। इसके 30 साल बाद उन्हें यह पदवी मिली है।
जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज ने अखाड़े की धर्म ध्वजा के नीचे माला पहनाकर उन्हें महामंडलेश्वर घोषित किया। उसके बाद उन्हें अमृत स्नान कराया गया। यह पदवी मिलने के बाद महामंडलेश्वर बालकानंद महाराज शनिवार को टोंक लौट रहे हैं। इस दौरान उनका जगह-जगह भव्य स्वागत किया जा रहा है। गाजे बाजे के साथ। उन्हें बग्गी में बिठाकर लाया जा रहा है। इनपुट: बाबू लाल पोसवाल, जामडोली यह भी पढ़ें 25 साल की उम्र में संत, 30 साल बाद महामंडलेश्वर:महाकुंभ में टोंक के हरभांवता आश्रम के बालकानंद महाराज को दी गई पदवी टोंक जिले के हरभांवता आश्रम के संत स्वामी बालकानंद महाराज को प्रयागराज महाकुंभ में महामंडलेश्वर की पदवी दी गई है। वे साल 1995 में संत बने थे। इसके 30 साल बाद उन्हें यह पदवी मिली है। पढ़ें पूरी खबर …


