देवघर में महामारी से सुरक्षा के लिए वार्षिक नगर गंवाली पूजा का आयोजन मंगलवार को धूमधाम से किया गया। बाबा वैद्यनाथ मंदिर प्रांगण स्थित माता काली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। मां का भव्य श्रृंगार किया गया। श्रद्धालु शाम से ही धुमना चढ़ाने मंदिर प्रांगण पहुंचने लगे। मंदिर प्रांगण के सभी देवी-देवता मंदिरों में आमंत्रण दिया गया। मां काली मंदिर के बाहर विशाल हवन कुंड बनाया गया। प्राचीन परंपरा के अनुसार, नगरवासी संध्या काल में धुमना से हवन करने पहुंचे। देवघर डीपी विशाल सागर ने भी मंदिर में पहुंचकर धुमना अर्पित किया। पूजा के दौरान सात्विक भोजन का नियम गंवाली पूजा की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। उस समय बीमारियों के इलाज की उचित व्यवस्था नहीं थी। जब कोई बीमारी महामारी का रूप लेती थी, तब लोग देवी मां की शरण में जाते थे। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार, चैत्र मास में मौसम परिवर्तन होता है। तापमान में उतार-चढ़ाव से महामारी का खतरा रहता है। इसलिए हर साल इस समय गंवाली पूजा की जाती है। शहर की सुरक्षा के लिए चारों दिशाओं को मंत्रोच्चार से बांधा जाता है। पूर्व में त्रिकूट पर्वत, पश्चिम में उठवा नदी, उत्तर में हरलाजीरी और दक्षिण में श्मशान को बांधा जाता है। पूजा के दौरान सात्विक भोजन का नियम है।


