झालावाड़ शहर के मंगलपुरा स्थित बाराद्वारी क्षेत्र में राजराजेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया। यह श्रृंगार देशभर में प्रसिद्ध उज्जैन के महाकाल मंदिर जैसा होता है, जिसके दर्शन के लिए शाम से रात तक भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया है और बाहर मेले का आयोजन भी किया गया है। मंदिर के पंडित प्रशांत शुक्ला ने बताया कि शाम को उज्जैन के महाकाल जैसा श्रृंगार किया जाता है, जिसके दर्शन के लिए रातभर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। झालावाड़ का यह ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर रियासतकालीन समय में निर्मित किया गया था। इसे स्थानीय और बाहरी लोगों के बीच गहरी श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। इस मंदिर का अस्तित्व झालावाड़ की स्थापना के समय से ही माना जाता है। यह मंदिर कई राजनेताओं की आस्था का भी केंद्र रहा है। प्रदेश सहित केंद्र के भी कई भाजपा नेता यहां पूजा-अर्चना कर चुके हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहां पूजा-अभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह मंदिर ऐतिहासिक रूप से तंत्र विद्या के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। मंदिर की संरचना रियासतकालीन स्थापत्य कला का एक सुंदर उदाहरण है, जो शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करती है। महाशिवरात्रि पर यहां सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। भक्तजन पूजा-अर्चना और अभिषेक कर रहे हैं, जिसमें बेलपत्र, जल, दूध, दही और फूलों का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भक्त नंदी के कान में अपनी मनोकामनाएं भी मांग रहे हैं। शहर के मध्य स्थित होने के कारण यहां दर्शनार्थियों की भारी भीड़ रहती है और मंदिर के बाहर पूजा सामग्री की दुकानें भी लगी हुई हैं। ऐतिहासिक बाराद्वार और बावड़ी कुंड मंदिर परिसर की बनावट ऐतिहासिक काल से होने के कारण यहां बारह द्वार है, विशेष अवसर पर यहां डेकोरेशन और सजावट की जाती है। शिवरात्रि के अवसर पर दिनभर भक्तो का आना जाना लगा रहता है। वहीं, आगे कुंड के अलावा पीछे प्राचीन बावड़ी है और बालाजी मंदिर मौजूद है।
इस मंदिर में राजनेता भी लगा चुके हैं ढोक
इस मंदिर में हम भक्त ही नहीं कई राजनेता यहां आकर पूजा अभिषेक कर चुके है। यहां पूर्व सीएम वसुधंरा राजे, सांसद दुष्यन्त सिंह, बीजेपी के स्वर्गीय नेता प्रमोद महाजन समेत अन्य राजनेता भी यहां आकर पूजा अर्चना अभिषेक कर चुके है। झालावाड़ राज परिवार के सदस्य भी यहां पूजा अर्चना करने आते है।
तीसरी पीढ़ी कर रही पूजा अर्चना वर्तमान में पूजा अर्चना करने वाले पंडित प्रशांत शुक्ला ने बताया कि यहां उनकी तीसरी पीढ़ी सेवा पूजा का कार्य संभाल रही है,सबसे पहले उनके दादाजी स्वर्गीय गोपीचंद शुक्ला एवं उनके बाद उसके पिता मोहनलाल शुक्ला और अब वह स्वयं यहां पूजा अर्चना का काम संभाल रहे हैं। इस मंदिर का प्राचीन काल में निर्माण झालावाड़ गढ़ परिसर के दौरान हुआ है।


