कम्युनिटी रिपोर्टर| भिलाई फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी तिथि यानी महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी रविवार को पड़ रहा है। दो तिथियों और भगवान शिव के विवाह का पर्व होने की वजह से इसे त्रिस्पर्शा कहा गया है। इस तिथि को शाम 5.04 बजे तक त्रयोदशी तिथि है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग रही है। दिनभर सूर्य प्रधान नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है। रात 7.47 के बाद चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र लगेगा, जो रातभर रहेगा। इस दिन चंद्र प्रधान नक्षत्र की युति होने से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। यह भगवान शिव की कृपा और ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए दुर्लभ संयोग है। राहू, सूर्य, शुक्र और बुध मिलकर इसे चतुर्ग्रही महायोग बन रहा है। यह पूजापाठ, जप और तप के लिए श्रेष्ठ व्यातिपात योग है। मंगल और चंद्र की युति से महालक्ष्मी योग बन रहा है। कई वर्षों बाद यह दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषी पं. दत्तात्रेय होस्केरे ने बताया कि शास्त्रों में चतुर्दशी और श्रवण नक्षत्र की युति में शिवरात्रि पर्व मनाने का प्रावधान है। तिथि निर्णय ग्रंथ के अनुसार प्रदोष व्यापिनी ग्राह्य शिव रात्रि चतुर्दशी अर्थात उदय कालीन त्रयोदशी और रात में चतुर्दशी हो तो शिवरात्रि मनाना श्रेष्ठ है। सुबह गोचर में सूर्य, शुक्र, राहू और बुध का लग्नस्थ होना और लग्नेश शनि का भी लग्नस्थ होना कर्मशील व्यक्ति को शिव का शुभ आशीष मिलने के संकेत दे रहा है। पूजन के शुभ मूहूर्त {सुबह : 11.18 से 1.17 बजे तक वृषभ लग्न {सुबह : 11.36 से 12.24 बजे तक अभिजित मुहूर्त {शाम : 5.44 से 7.54 बजे तक सिंह लग्न {मध्य रात्रि : 11.52 से 12.32 तक {वृश्चिक लग्न में रात 12.16 से 2.32 तक इस तरह से करें महाशिवरात्रि पर पूजन महाशिवरात्रि के दिन सुबह उठकर स्नान करके एक वेदी पर कलश की स्थापना कर गौरी शंकर की मूर्ति या चित्र रखें। कलश को जल से भरकर रोली, मौली, अक्षत, पान सुपारी ,लौंग, इलायची अर्पित करें।


