सूरजपुर के पचिरा गांव में स्थित रेणुका नदी के तट पर एक अद्भुत स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। यह सिद्धेश्वर शिवलिंग के नाम से प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा अर्चना की गई। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, यह शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है। कोई नहीं जानता कि यह कब प्रकट हुआ, लेकिन अनादिकाल से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर इस स्थल का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव निराकार से साकार रूप में प्रकट हुए थे। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव पहली बार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। महाशिवरात्रि के दिन स्त्री-पुरुष सभी उपवास रखकर भगवान शिव की आराधना करते हैं। विधि-विधान से पूजा करने पर भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस दिन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।


