बरगी पुलिस चौकी प्रभारी पर पांच लाख रुपए लेने के आरोप पर संगठन के दो पदाधिकारी पवन सिंह देवक और प्रवीण सिंह को लीगल नोटिस भेजा है। एडवोकेट केके त्रिपाठी का कहना है कि महिला सब इंस्पेक्टर के पति की ओर से यह नोटिस दिया गया है। दोनों व्यक्तियों ने एक नाबालिग बच्ची से जुड़े मामले पर आरोपी को बचाने का गलत आरोप लगाया है। चौकी प्रभारी सरिता पटेल के पति ने पत्नी के पर 5 लाख रुपए मांगने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। चौकी प्रभारी के पति का कहना है कि बच्ची ने जैसा बयान दिया था, उसी के आधार पर चौकी प्रभारी ने कार्रवाई की है। इसके बाद भी उन पर झूठे आरोप लगाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई है। पहले समझ लें घटनाक्रम
बरगी नगर में रहने वाली 14 बच्ची क्षेत्र में रहने वाले महेश वर्मा के पास कई सालों से टूयशन पढ़ती आ रही है। छात्रा ने बताया कि 17 जनवरी को जब वह कोचिंग पढ़ने गई थी, तो महेश वर्मा ने उसके साथ पढ़ने वाली अन्य छात्राओं को छुट्टी दे दी, जबकि उसे रोक लिया।
छात्रा का कहना था कि उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश की गई, जिसकी शिकायत छात्रा की मां ने बरगी नगर पुलिस चौकी में करवाई गई है। रिपोर्ट के पास पुलिस ने कोर्ट के समक्ष छात्रा के बयान दर्ज करवाए और टीचर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए कानूनी कार्रवाई के लिए डायरी सीएसपी को भेजी गई। सीएसपी अंजुल अयंक का कहना है कि शिकायत पर बरगी चौकी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाबालिग बच्ची का बयान दर्ज किया। इसके बाद एससी,एसटी और पाक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की गई थी। बच्ची के कोर्ट में कथन भी हुए थे, जिस पर उसने छेड़छाड़ संबंधित शिकायत की थी। बच्ची के पिता बोले- हमने नहीं की शिकायत
बच्ची के पिता का भी वीडियो सामने आया है। उनका कहना है कि जो घटना बच्ची के साथ हुई थी, पुलिस ने वही लिखा है। पिता का कहना है कि पुलिस ने किसी भी तरह से राजीनामा का भी दबाव नहीं बनाया। ना ही कोई डर या दबाव था। पिता का कहना था कि मुझे नहीं पता वो लोग कौन हैं जो मेरी बच्ची के विषय में एसपी ऑफिस जाकर ज्ञापन देकर आए हैं, मैं तो उन्हें जानता भी नहीं हूं। भेजा लीगल नोटिस
बरगी नगर चौकी प्रभारी सरिता पटेल के पति चंचलेश पटेल ने अखिल भारतीय विधि छात्र संगठन पवन सिंह देवक और प्रवीण सिंह को लीगल नोटिस जारी कर कहा है कि जानबूझकर मेरी पत्नी के विरुद्ध झूठी, मनगढ़ंत एवं मानहानिकारक शिकायत तैयार कर उसका प्रसार/ प्रकाशन किया। भ्रष्टाचार एवं अधिकारों के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
चंचलेश पटेल का कहना है कि पत्नी सेवारत महिला पुलिस अधिकारी है। इस कृत्य से प्रतिष्ठा नष्ट करने की कोशिश की गई है। परिवार को मानसिक पीड़ा, सामाजिक अपमान एवं गरिमा-हानि पहुंचाने का उद्देश्य रखा। अधिवक्ता कृष्ण कांत त्रिपाठी ने बताया- सात दिनों के भीतर बिना शर्त माफी, शिकायतों की वापसी और मानहानिकारक सामग्री हटाने की कार्रवाई नहीं की जाती, तो आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक अभियोजन, दीवानी मानहानि व हर्जाने का दावा तथा अन्य कानूनी कार्रवाई न्यायालय जबलपुर में प्रारंभ की जाएगी।


