महिला किसान का नवाचार:कीट नियंत्रण के लिए जैविक दवा ​​​​​​​इजाद की, यह बाजार के मुकाबले पांच गुणा सस्ती

कांकेर जिले के थानाबोड़ी गांव में महिला किसान लेकेश बाई जैन ने फसलों को कीटों के प्रकोप से बचाने के लिए अपने अनुभव को काम में लिया और जैविक दवा इजाद कर दी। इससे उन्हें महंगे पेस्टिसाइड से छुटकारा मिला। इसके बाद थानाबोड़ी व आसपास के क्षेत्र के लगभग 50 अन्य किसान भी उनसे इस दवा को बनाने की तकनीक सीख चुके हैं।
बारहवीं तक पढ़ीं लेकेश बाई ने बताया, 1996 में शादी के बाद मैं नरहरपुर के थानाबोड़ी गांव आई। यहां देखा एक एकड़ से कम खेत है, जिसमें परिवार के खाने लायक धान भी नहीं होता था। मैं कांकेर जाकर कृषि-उधानिकी अफसरों से मिली। सब्जी उगाने की उन्नत तकनीक सीखी। पहले बाजार से पेस्टिसाइड लाते थे। ये महंगे और नुकसानदेह होते हैं। इसलिए लगातार प्रयोग कर 25 लीटर मठ्‌ठा छाछ, तांबे का लोटा, दो किलो नीम पत्ती, दो किलो फुडहर पत्ता, आधा किलो मिर्च के मिश्रण से जैविक दवा तैयार की। व्हाइट फ्लाई का प्रकोप हो तो इस मिश्रण में मिर्च की जगह लहसुन का उपयोग कर सकते हैं। यह जैविक दवा सस्ती पड़ती है। एक एकड़ में छिड़काव के लिए बाजार में मिलने वाले पेस्टिसाइड पर 2000 से 2200 रुपए खर्च हो जाते हैं जबकि यह जैविक दवा 300 से 400 रुपए में बन जाती है। लेकेश बाई ने बताया, हमने कर्ज लेकर खेत में बोर कराया। धान की जगह साल में सब्जी की 3 फसल लेना शुरू किया। जिस खेत से खाने के पूरा धान भी नहीं हो रहा था, उससे साल में 2-3 लाख रुपए बचने लगे। धीरे-धीरे आसपास के खेत खरीदे। पूरे खेत में ड्रिप इरिगेशन सिस्टम लगवाया। अब हमारे पास 17 एकड़ खेत है जहां टमाटर, मिर्च, बरबट्‌टी, भिंडी, करेला आदि लगाते हैं। कई सब्जी विक्रेता खेत पर ही आकर सब्जियां ले जाते हैं। इसके अलावा नरहरपुर, चारामा, धमतरी तथा रायपुर तक सब्जियां बिकने जाती हैं। खेती के साथ डेयरी भी शुरू की। हमारे पास 35 गायें हैं जिनसे रोजाना औसतन 200 लीटर दूध होता है। चारा खेत से ही मिल जाता है। खेत में तालाब खुदवाकर उसमें मछली पालन के जरिए भी अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। खेत में 8 परिवारों के 30 लोगों को सीधे रोजगार दे रहे हैं। इन परिवारों के लिए खेत में ही घर बनवा दिए हैं। हमारे यहां खेती की उन्नत तकनीक देखने अब तक 500 से अधिक किसान आ चुके हैं। इनमें से 200 किसान उन्नत खेती अपना चुके हैं।

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