रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में JPL कोयला खदान के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान 27 दिसंबर 2025 को भड़की हिंसा को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी का कहना है कि विवाद के दौरान महिला पुलिसकर्मी के साथ ही नहीं ग्रामीण महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया, आप ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल ग्रामीण महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा किए गए अमानवीय व्यवहार को जानबूझकर दबाया जा रहा है। गांव की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनकी साड़ियां फाड़ी गईं, उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई, लेकिन इन घटनाओं के वीडियो सामने नहीं लाए गए। फर्जी जनसुनवाई से भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
AAP की प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता प्रियंका शुक्ला के नेतृत्व में गठित जांच समिति ने कहा कि तमनार की हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी शुरुआत एक फर्जी जनसुनवाई से हुई थी। पार्टी का आरोप है कि यह जनसुनवाई उद्योगपति और बीजेपी नेता नवीन जिंदल को फायदा पहुंचाने के लिए की गई। जिस जनसुनवाई की बात की जा रही है, उसमें गांव के महज 12 से 15 लोग शामिल थे, जिन्हें जिंदल समर्थक बताया जा रहा है। इसकी सूचना भी केवल चार दिन पहले दी गई, जिससे स्पष्ट है कि स्थानीय ग्रामीणों को जानबूझकर प्रक्रिया से दूर रखा गया। जैसे ही ग्रामीणों को जनसुनवाई की जानकारी मिली, उन्होंने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध के बीच 11 दिसंबर 2025 से CHP चौक पर आर्थिक नाकेबंदी की गई। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने जनसुनवाई का स्थान बदल दिया, लेकिन इससे गुस्सा और बढ़ गया। ग्रामीणों का कहना था कि अगर उनकी जल, जंगल और जमीन छीनी गई तो वे आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे। महिला टीआई के साथ ही ग्रामीण महिलाओं से भी हुई बदसलूकी 27 दिसंबर को हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए, जब महिला टीआई के नेतृत्व में जिंदल की कोयला लदी गाड़ियों को जबरन पास कराने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने करीब 50 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसी दौरान एक कोयला ट्रक की टक्कर से 70 वर्षीय बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। खबर फैली कि उनकी मौत हो गई है, जिससे माहौल और भड़क उठा। बाद में गांव वालों ने जांच समिति को बताया कि बुजुर्ग की 4 जनवरी 2026 को मौत हो चुकी है, लेकिन इस मामले पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई या चर्चा नहीं की जा रही। AAP का कहना है कि फोकस सिर्फ महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई घटना पर रखा गया, जबकि आंदोलनकारी महिलाओं के साथ हुई बर्बरता को नजरअंदाज कर दिया गया। ग्रामीण महिलाओं ने जांच समिति को बताया कि वे महिला टीआई को भीड़ से बचाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन इसी दौरान पुलिस ने उन पर लाठियां बरसाईं, उनके कपड़े फाड़े गए और अपमानित किया गया। प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने आरोप लगाया कि बुजुर्ग की मौत और पूरे घटनाक्रम से ध्यान भटकाने के लिए दो निर्दोष युवकों—चिनैश खमारी और कीर्ति श्रीवास—को फंसा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ पढ़ाई करने वाले छात्र हैं, जिन्हें सेंट्रल लाइब्रेरी से उठाया गया। पार्टी ने ऐलान किया है कि 12 जनवरी 2026 को ग्रामीण और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता थाना प्रभारी और अन्य सक्षम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करेंगे। रिटायर जज करें मामले की जांच AAP ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के किसी रिटायर जस्टिस के नेतृत्व में न्यायिक जांच आयोग गठित किया जाए। साथ ही जिस जनसुनवाई को लेकर पूरा विवाद खड़ा हुआ, उसे तत्काल निरस्त किया जाए। पार्टी का कहना है कि जब तक आंदोलनकारी महिलाओं के साथ हुई बदसलूकी, कपड़े फाड़ने और बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक जनता का न्यायिक व्यवस्था और सरकार पर भरोसा बहाल नहीं हो पाएगा। प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि जांचदल को गांव वाले यह भी बताए कि जिंदल की कोयला वाली ट्रक से हुए एक्सीडेंट की घटना के बुजुर्ग की दिनांक 04/1/2026 को मौत हो चुकी है, उसके बारे में कही कोई बात क्यों नहीं की जा रही?? उल्टा आम गांव के दो निर्दोष युवक चिनैश ख़मारी और कीर्ति श्रीवास को फंसा दिया गया है। जिसके लिए सोमवार दिनांक 12/1/26 को गांव वाले और आम आदमी पार्टी के लोग थाना प्रभारी समेत सक्षम अधिकारियों के समक्ष जाकर लिखित ज्ञापन देंगे। आम आदमी पार्टी ने यह मांग है कि घटना में कई और साक्ष्य है जो जांच का विषय है जो अक्टूबर की जनसुनवाई में भी शामिल थे उन सब की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही वहां की जो महिला पुलिसकर्मी के साथ घटना हुई और उसके पहले महिलाओं के भी कपड़े फटे हैं उस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जो लोग जेल में है वह सारे दोषी नहीं है उनमे 2 पढ़ने लिखने वाले स्टूडेंट है जिन्हें सेंट्रल लाइब्रेरी से उठाया गया था,उनकी रिहाई की जाने की चाहिए। घटना के सम्बन्ध में हाईकोर्ट के किसी रिटायर जस्टिस के नेतृत्व में एक जांच आयोग गठित होना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। साथ ही जनसुनवाई निरस्त की जानी चाहिए, ताकि जनता के बीच न्यायिक संस्थाओं और सरकार जैसी व्यवस्था पर विश्वास बन सके।


