छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ जिले में स्थित चिरमिरी की कोयला खदानें नारी सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं। यहां महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। चिरमिरी की ओपन कास्ट माइंस में महिलाएं बड़ी-बड़ी मशीनों का संचालन कर रही हैं। वे न सिर्फ भारी मशीनरी चला रही हैं, बल्कि कोयले का उत्खनन भी कर रही हैं। खदानों में बारूद लगाने जैसे जोखिम भरे काम भी इन महिलाओं की जिम्मेदारी में शामिल हैं। उत्कृष्ट कार्य के लिए मिलता है सम्मान SECL चिरमिरी प्रबंधन इन महिलाओं के उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए समय-समय पर उन्हें पुरस्कृत करता रहता है। यह महिलाएं देश में नारी सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश कर रही हैं। इन महिलाओं की कार्यकुशलता और साहस से साबित होता है कि किसी भी क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों से कम नहीं हैं। चिरमिरी की कोयला खदानों में काम करने वाली ये महिलाएं अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं। 12 साल से चला रही साबल मशीन साबल मशीन ऑपरेटर हेमलता बताती है कि वे 12 – 13 साल से साबल मशीन संचालित कर रही है जिनमें वे रोजाना कोयला-मिट्टी को लोड करती है और वे इस काम को बड़े आनंद के साथ करती है। दिन भर में 50-60 गाड़ी लोडिंग करना होता है। हेमलता का कहना है कि महिलाएं हर काम कर सकती है। 17 सालों से कर रही ब्लास्टिंग का काम ब्लास्टिंग का काम करने वाली सबिता सिंह बताती है कि होल को नापने के बाद उसमें बारुद डाला जाता है। कनेक्शन देकर केबिल बिछाते है फिर ब्लास्टिंग करते है। 17 सालों से ये काम कर रही अब डर भी खत्म हो गया। महिलाओं से मिलती है हिम्मत चिरमिरी ओपन कास्ट माइंस के मैनेजर संतोष कुमार बताते है कि यहां टाइम कीपर से लेकर माइंस में ब्लास्टिंग प्रक्रिया तक महिलाओं का सहयोग रहता है। ओपन कास्ट के विकास में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है। यहां 100 पुरुष है तो 125 महिलाएं काम कर रही है। इन्ही से हमें काम करने की हिम्मत मिलती है।


