साहब! हमारी सुनवाई करो मंगलवार को डिंडौरी कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई में जिले भर से 89 लोग अपनी-अपनी परेशानी लेकर पहुंचे। किसी को रोजगार चाहिए था, तो कोई गांव के दबंगों से परेशान था। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने सबकी बातें सुनीं और 69 आवेदनों पर तुरंत अधिकारियों को बोल दिया कि इन पर जल्दी काम शुरू किया जाए। पति की मौत के बाद कटा जॉब कार्ड, महिला बोली- “अब जान देने के अलावा कोई रास्ता नहीं” जनसुनवाई में कसईसोढा गांव की ममता टेकाम ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। ममता ने बताया कि 4 साल पहले उनके पति का निधन हो गया था, जिसके बाद गांव के रोजगार सहायक ने उनका जॉब कार्ड ही डिलीट कर दिया। ममता पर दो बेटियों, ससुर और विकलांग जेठ की जिम्मेदारी है, लेकिन कार्ड न होने से उन्हें मजदूरी नहीं मिल रही है। महिला ने जनपद के अधिकारी पर भी परेशान करने का आरोप लगाया और कहा कि वे अब तंग आ चुकी हैं। स्कूल के खाने का काम मिलीभगत से अपनों को दे रहे शहपुरा की महिलाओं ने मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) को लेकर अधिकारियों के सामने शिकायत की। कृष्णा और हरिहर समूह की महिलाओं का कहना है कि शहर के 22 समूहों की लिस्ट भेजी गई थी, लेकिन अधिकारियों ने सेटिंग करके उन्हीं को काम दे दिया जो पहले से वहां खाना बना रहे हैं। महिलाओं ने मांग की कि काम का बंटवारा ईमानदारी से हो ताकि बाकी गरीब महिलाओं को भी कमाई का जरिया मिले। गली का रास्ता बंद: “घर से निकलना हुआ मुश्किल, बच्चे कैसे जाएं स्कूल?” समनापुर के वार्ड नंबर 17 से आए ग्रामीणों ने बताया कि उनके मोहल्ले का रास्ता बंद कर दिया गया है। देवलाल और रोहित ने बताया कि उन्होंने जमीन खरीदकर घर बनाया था और निकलने के लिए 5 फीट की गली थी। लेकिन अब जमीन के नए मालिक ने वहां दीवार खड़ी कर दी है। रास्ता बंद होने से 18 परिवारों की आवाजाही ठप हो गई है और बच्चों का स्कूल जाना भी दूभर हो गया है।


