महिषासुर मर्दिनी की प्रस्तुति से हुआ कार्यक्रम शुरू:जयपुर में कुचिपुड़ी नृत्य सर्किट में शास्त्रीय संगीत और संस्कृति की दी जानकारी

भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को युवाओं के बीच प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्पिक मैके जयपुर चैप्टर की ओर से कुचिपुड़ी नृत्य सर्किट का आयोजन किया गया।
इस दौरान मणिपाल यूनिवर्सिटी, आर्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड आईटी और पूर्णिमा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। कुचिपुड़ी की मुद्राओं और बारीकियों को समझाया
कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना टी रेड्डी लक्ष्मी ने दुर्गा स्तोत्र महिषासुर मर्दिनी की प्रस्तुति से की।
स्पिक मैके जयपुर चैप्टर की कोऑर्डिनेटर डॉ. मृणाली कांकर ने बताया कि नृत्यांगना ने कुचिपुड़ी नृत्य की विभिन्न मुद्राओं और उसकी बारीकियों को छात्र-छात्राओं को समझाया। द्रौपदी चीर हरण परफोर्म ने किया मंत्रमुग्ध
इसके अलावा उन्होंने आज आए शाम मोहन गायन पर आधारित द्रौपदी चीर हरण दृश्य प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में आदि शंकराचार्य कृत “शिव तरंगम” की भावपूर्ण प्रस्तुति भी हुई, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। संगीत संगत और संवाद सत्र
इस दौरान जयन कोट्टक्कल (गायन), वेत्रि भूपति (मृदंग) और किम सौम्या कन्नन (वायलिन) ने कुचिपुड़ी नृत्य संगत में योगदान दिया। प्रस्तुति के बाद विद्यार्थियों ने कलाकारों से बातचीत कर इस नृत्य शैली के बारे में गहन जानकारी प्राप्त की। इस कार्यक्रम में मणिपाल यूनिवर्सिटी में 200-250, आर्य कॉलेज में 350-400 और पूर्णिमा इंस्टीट्यूट में 300-350 छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भाग लिया। स्पिक मैके जयपुर चैप्टर के आर्टिस्ट कोऑर्डिनेटर अजीत पंडित भी इस अवसर पर मौजूद रहे। आज बिट्स पिलानी में होगा परफॉर्म
स्पिक मैके के इस कुचिपुड़ी नृत्य सर्किट का शुभारंभ 17 फरवरी को अलवर से हुआ था। यह सर्किट जयपुर, वनस्थली विद्यापीठ और पिलानी के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आयोजित किया जा रहा है। इसका समापन 21 फरवरी को बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BITS), पिलानी में होगा। संस्था के पदाधिकारियों ने कलाकारों का दीप प्रज्वलन कर स्वागत किया और छात्रों को भारतीय शास्त्रीय कलाओं के महत्व से अवगत कराया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी जयपुर में इस प्रकार के सर्किट आयोजित किए जाएंगे, ताकि युवा पीढ़ी भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।

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