आगर मालवा के मां बगलामुखी मंदिर नलखेड़ा में गुरुवार को तनाव की स्थिति पैदा हो गई। मंदिर के पंडितों ने धरना-प्रदर्शन करते हुए सुसनेर एसडीएम सर्वेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्हें तत्काल हटाने की मांग की। मनमाने ढंग से नए नियम लागू करने का लगाया आरोप पंडितों का आरोप है कि एसडीएम सर्वेश यादव बिना पूर्व सूचना और चर्चा के मनमाने ढंग से नए नियम लागू कर रहे हैं। इससे वर्षों से मंदिर में सेवा दे रहे पंडितों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पंडित योगेश शर्मा के अनुसार, मंदिर में लगभग 200 पंडित पिछले 25 सालों से नियमित रूप से हवन-अनुष्ठान कर रहे थे। उन्हें अचानक हटा दिया गया और अस्थायी रसीद व्यवस्था लागू कर दी गई, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। दरअसल, पंडित देवेंद्र शास्त्री बगलामुखी मंदिर में करीब 25 सालों से और योगेश शर्मा 20 सालों से हवन-पूजन अनुष्ठान करवा रहे हैं। सीएम का रिश्तेदार बताकर दबाव बनाने का आरोप पंडित देवेंद्र शास्त्री ने बताया कि एसडीएम नए-नए नियम बनाकर हमें परेशान करते हैं। हमारे साथ अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते है। खुद को सीएम का रिश्तेदार बनाकर हमें धमकाते हैं। कहते हैं कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। वे हम पंडितों-ब्राह्मणों को हरामखोर कहकर हमारा अपमान करते हैं। दरअसल, पुरानी व्यवस्था के अनुसार 2100 रुपए के हवन के लिए 350 रुपए, 5100 रुपए के हवन के लिए 500 रुपए और 11 हजार रुपए के हवन के लिए 700 रुपए की रसीद मंदिर प्रशासन की बनाई जाती थी। नई व्यवस्था के अनुसार सारे स्लैब हटाते हुए सिर्फ एक स्लैब 2100 रुपए के हवन का रखा गया है। इससे पंडितों को आर्थिक नुकसान होने लगा। नई व्यवस्था के मुताबिक, हवन से पहले रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी पंडित योगेश शर्मा ने बताया कि पहले मंदिर में हवन पूजन कराने के लिए पंडितों को किसी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं थी, जिसकी वजह से कोई भी पंडित जो पूजन पाठ का कार्य जानता है वह अपने परिचित जजमानों को पूजन करा देता था, ऐसे में कई फर्जी पंडित भी वहां आने वाले श्रद्धालुओं को पूजन कराने लगे। नई व्यवस्था के अनुसार सभी पंडितों को रजिस्ट्रेशन कराने का फरमान लागू किया गया है। जब तक रजिस्ट्रेशन न हो वे पूजा पाठ नहीं करवा पाएंगे। इस दौरान कई पंडितों ने रजिस्ट्रेशन करवाया लेकिन कई पंडित इससे वंचित रह गए। इनमें कई ऐसे थे जिनकी तीन से चार पीढ़ियां मंदिर में पूजन पाठ करवाती चली आ रही हैं। जिस पंडित के नाम से हवन कुंड बुक, वही कराएगा अनुष्ठान पंडित योगेश शर्मा ने बताया कि पुरानी व्यवस्था के अनुसार हवन कुंड बुक करवाने के बाद किसी वजह से जजमान नहीं पहुंच पाते या एक से अधिक जजमान एक ही पंडित के पहुंच जाते तो वह दो या अधिक कुंड बुक करवा कर अपने सहयोगी पंडित से अनुष्ठान करवा लेते थे। जजमान नहीं पहुंचने पर उस कुंड पर कोई अन्य पंडित आपसी सहमति से अपने जजमान को अनुष्ठान करवा देता था। नई व्यवस्था के अनुसार जिस पंडित के नाम से हवन कुंड बुक हुआ है वही पंडित वहां हवन अनुष्ठान करवाएगा। ऐसे में जिस पंडित के एक से अधिक जजमान एक समय आ जाते हैं, उनके सहयोगी पंडित हवन अनुष्ठान नहीं करवा पा रहे हैं। मंदिर परिसर में पंडितों ने एसडीएम के खिलाफ की नारेबाजी आक्रोशित पंडितों ने मंदिर परिसर में एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में अनिश्चितकाल के लिए हवन-अनुष्ठान बंद करने की घोषणा भी की। मामले की सूचना मिलने पर तहसीलदार प्रियंक श्रीवास्तव और थाना प्रभारी नागेश यादव मंदिर परिसर पहुंचे। वे पंडितों से चर्चा कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन और पंडितों के बीच बातचीत जारी है। एसडीएम के पद से हटाने की मांग पर अड़े पंडित एडीएम आरपी वर्मा ने करीब एक घंटा तक पंडितों से चर्चा की। इस दौरान एडीएम ने आश्वस्त किया कि एसडीएम मंदिर से संबंधित कोई निर्णय आगे से नहीं लेंगे। लेकिन प्रदर्शनकारी पंडित एसडीएम को सुसनेर अनुविभाग से हटाने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। सम्भवत; कल नलखेड़ा बंद का आव्हान भी किया जा सकता है। एसडीएम बोले-मनमानी वसूली रोकने के लिए बनाए गए नियम पूरे घटनाक्रम को लेकर एसडीएम सर्वेश यादव का कहना है कि हमारी ओर से किसी तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया। हमने किसी के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया गया है। यहां पर हवन को लेकर 2100, 3100, 5100 की अलग-अलग राशि पंडितों की ओर से वसूली जा रही थी। जिसको लेकर मैंने एक स्लैब ₹2100 वाला बनाया है, जिसे कोई अन्य हवन, किसी अन्य तरह की पूजा करवाना हो तो वह आवेदन देकर उस तरह का हवन पूजन करवा सकता है। एसडीएम ने कहा कि पंडितों की ओर से मनमानी वसूली की जा रही थी, जिसको लेकर ही हमने नियम बनाए। यहां यह भी हो रहा था कि स्लॉट कोई अन्य पंडित का बुक होता था और उस पर हवन कोई अन्य करवाता था। जो भी नियम बनाए गए हैं वह मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ही बनाए गए हैं।


