भास्कर न्यूज | राजनांदगांव राजधानी रायपुर से शुक्रवार को सुबह पुरातत्व विभाग की टीम राजनांदगांव पहुंची। टीम ने सिद्ध शक्तिपीठ मां शीतला मंदिर का जायजा लिया। मंदिर के इतिहास, स्थापना, प्राचीन कुएं, मूर्तियों, राजा के मठ, अन्य ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी मंदिर के बड़े महाराज पंडित सुरेश कुमार दुबे ने दी। टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण कर फोटो और वीडियो लिए। नापजोख कर दस्तावेज तैयार किए हैं। पूर्व पार्षद देवेंद्र लाला देबू ने कहा कि इस वर्षों पुराने ऐतिहासिक मंदिर का कायाकल्प और विकास जरूरी है। टीम के प्रमुख पुरातत्ववेत्ता प्रभात सिंह ने बताया वे विभाग के संचालक के निर्देश पर आए हैं। मंदिर चारों ओर से तालाबों से घिरा है। जल की उपस्थिति बताती है कि यह एक प्राचीन ऐतिहासिक गढ़ी रही होगी। मंदिर के गर्भगृह और बाहरी हिस्से में प्रस्तर मूर्तियां हैं। इनका ऐतिहासिक महत्व है। मंदिर परिसर में स्थित कुआं प्राचीन पत्थरों और तकनीक से बना है। यहां दक्षिण-पूर्व दिशा में राज परिवार की 16 समाधियां मौजूद हैं। इनमें राजा बलराम दास, राजा दिग्विजय दास सहित अन्य राजाओं की समाधियां हैं। यह मंदिर से जुड़े इतिहास को दर्शाती हैं। पर्यटन संचालक को सौंपी जाएगी रिपोर्ट टीम ने सभी ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी जुटाई। फोटो और माप लेकर प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा। यह रिपोर्ट पर्यटन संचालक को सौंपी जाएगी। विभाग का उद्देश्य है कि किसी भी ऐतिहासिक स्थल के विकास कार्य में उसकी प्राचीनता से छेड़छाड़ न हो। इस मौके पर पंडित राज दुबे, चंद्रकांत दुबे, मंगल दुबे, पीयूष दुबे, रवि प्रकाश दुबे, अंकित दुबे, सुभाष दुबे, देवेंद्र सोनी, संजय शिवलिंकार मौजूद थे।


