मां सहित 4 की हत्या, फिर भी नहीं छोड़ी पढ़ाई:स्कूलों में लड़कियों की शिक्षा-सुविधाओं के लिए कर रहीं संघर्ष, शिल्पा शेट्‌टी ने भी सराहा

भरतपुर की 35 साल की ऊषा सोलंकी बचपन में परिवार पर हुए हमले में मां, दादी और चाची को खो चुकी थीं। पिता लंबे समय कोमा में रहे। मुश्किल हालातों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी। आज वे 50 से अधिक सरकारी स्कूलों और 62 आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़कर टॉयलेट-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं और बच्चों की शिक्षा व महिलाओं के रोजगार के लिए काम कर रही हैं। अभिनेत्री शिल्पा शेट्‌टी भी उनके कामों की सराहना कर चुकी हैं। महिला दिवस पर पढ़िए उनके संघर्ष और सफलता की कहानी… ऊषा की जिंदगी में संघर्ष बहुत छोटी उम्र से शुरू हो गया था। 1993 में उनके दादा की हत्या हो गई थी। गांव में एक विवाद हो गया था। इसके बाद गांव के ही एक आदमी ने उषा के दादा की हत्या कर दी थी। यह घाव अभी भरा भी नहीं था कि 1995 में एक और दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर में घुसकर कुछ लोगों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस हमले में उनकी मां, दादी और चाची की मौत हो गई। पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। पिता की जान तो बच गई, लेकिन वो कोमा में चले गए। लंबे समय तक उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहा। उस समय उषा सिर्फ 7 साल की थीं। घर में सगे-चचेरे भाई-बहनों को मिलाकर कुल 7 बच्चे थे। एक ही छत के नीचे रहते थे। अचानक सबके सिर से मां का साया उठ गया। परिवार के सामने भविष्य को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया। बुआ बनीं सहारा, ऊषा ने की MBA
ऊषा बताती हैं- इतनी बड़ी त्रासदी के बाद बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी उनकी बुआ ने उठाई। उन्होंने न सिर्फ बच्चों को सहारा दिया बल्कि उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत भी दी। बुआ की शादी उत्तर प्रदेश के गांव में हो गई थी। बच्चों की परवरिश के लिए बुआ लंबे समय तक भरतपुर ही रहीं। जब बच्चे कुछ बड़े हो गए उसके बाद ही वह वापस अपने ससुराल गईं। ऊषा कहती हैं कि उस समय आर्थिक और भावनात्मक दोनों तरह की चुनौतियां थीं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी बच्चों को घर में ही रहना पड़ता था। स्कूलिंग घर से ही हुई थी। कठिन हालातों के बावजूद ऊषा ने पढ़ाई नहीं छोड़ी। एमबीए (MBA) और एमएसडब्ल्यू (MSW) किया। इसके बाद उन्होंने समाज सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए सोशल वर्क में पीएचडी शुरू की। उनका मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री नहीं, समाज में बदलाव लाने का सबसे मजबूत रास्ता है। 2010 से बच्चों की शिक्षा के लिए काम
ऊषा ने साल 2010 से इस दिशा में सक्रिय रूप से काम शुरू किया। ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। कई जगहों पर साफ पानी नहीं होता। शौचालयों की स्थिति खराब होती है। इन समस्याओं का सबसे ज्यादा असर लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ता है। कई बार छात्राएं स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। इसी को देखते हुए ऊषा ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की पहल की। आज ऊषा 50 से अधिक सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए काम कर रही हैं। इसके साथ ही वह 62 आंगनबाड़ी केंद्रों से भी जुड़ी हुई हैं। वह स्कूलों में टॉयलेट और स्वच्छ पानी की व्यवस्था बेहतर करवाने के लिए स्थानीय समुदाय, प्रशासन और संस्थाओं के साथ मिलकर काम करती हैं। ऊषा का कहना है कि बच्चों को पढ़ने के लिए सुरक्षित और साफ वातावरण मिलेगा, तभी वे अपने सपनों को पूरा कर पाएंगे। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
बच्चों के साथ काम करने के अलावा ऊषा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम कर रही हैं। ग्रामीण और दिव्यांग महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उन्होंने मावली कॉउचर नाम की संस्था की शुरुआत की। इस पहल के तहत महिलाओं को सिलाई और अन्य कौशल का प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। इसके अलावा अपने सामाजिक कार्यों को संगठित रूप देने के लिए ऊषा ने दरख्त छांव फाउंडेशन की स्थापना की। यह संस्था शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम कर रही है। इसके जरिए सैकड़ों बच्चों और महिलाओं तक मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। शिल्पा शेट्टी ने भी सराहा ऊषा का काम
ऊषा सोलंकी के काम की सराहना अब देशभर में होने लगी है। उनके प्रयासों से प्रभावित होकर फिल्म अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने भी उनकी मदद की। ऊषा बताती हैं कि एक दिन अचानक उनके पास एक फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को शिल्पा शेट्टी के फाउंडेशन से जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ऊषा के काम का वीडियो देखा है और उनके प्रयासों से काफी प्रभावित हैं। ऊषा के मुताबिक, शुरुआत में उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि यह कॉल सच में शिल्पा शेट्टी के फाउंडेशन से है। बाद में फाउंडेशन की ओर से उनसे विस्तार से बातचीत की गई और उनके काम की जानकारी ली गई। इसके बाद शिल्पा शेट्टी की ओर से ऊषा के कार्यों के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया गया, ताकि वह बच्चों और महिलाओं के लिए चल रहे अपने प्रयासों को और आगे बढ़ा सकें। ऊषा कहती हैं कि यह सहयोग उनके लिए सिर्फ मदद नहीं, बल्कि उनके काम की बड़ी सराहना और प्रेरणा भी है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *