भास्कर न्यूज | जालंधर इस बार माघ अमावस्या 17-18 जनवरी की मध्य रात्रि 12:06 मिनट से शुरू होगी। 18 जनवरी को पूरे दिन अमावस्या रहेगी और 19 जनवरी की सुबह 1:24 मिनट तक है। उदय काल 18 जनवरी को होने की वजह से माघ मौनी अमावस्या रविवार की मान्य रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ महीने में स्नान, दान, उपवास और तप का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने का संबंध श्रीकृष्ण के माधव स्वरूप से माना जाता है। यही वजह है कि इस महीने में कन्हैयाजी की पूजा की जाती है। इस महीने में मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्रि और बसंत पंचमी जैसे पर्व मनाए जाएंगे। शिव मंदिर मोता सिंह नगर के पं. संतोष शास्त्री और शिव शक्ति मां बगलामुखी धाम के पं. विजय शास्त्री ने बताया कि माघ अमावस्या पूजा-पाठ, नदी स्नान, तीर्थ दर्शन के साथ ही मौन रहने का पर्व है। मौन रहने से धर्म लाभ के साथ ही स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। पुराने समय में ऋषि-मुनि लंबे समय तक मौन व्रत धारण करते थे। 1. अमावस्या के स्वामी पितर माने गए हैं। इसलिए माघ महीने की मौनी अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करने का विधान है। इससे पितृ दोष में राहत मिलती है। 2. इस दिन पीपल के पेड़ को जल अर्पित करने का भी विधान है। पीपल को अर्पित किया गया जल देवों और पितरों को ही अर्पित होता है। इस दिन पीपल का पौधा रोपा जाना मंगलकारी होता है। पीपल की पूजा-अर्चना करने से कई गुना फल मिलता है। वहीं, मौन रहने से हमारी वाणी के दोष दूर होते हैं। इससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है।


