प्रयागराज के माघ मेला में हाईलेवल डिग्री लेने वाले खुद का करियर संवार रहे हैं। एमटेक, बीटेक और ग्रेजुएट कर चुके युवा खुद के टी स्टॉल खोल रहे हैं। ये युवा कहते हैं- खुद का बिजनेस बेहतर, भले ही छोटा है, मगर अपना है। जॉब से ज्यादा सिक्योरिटी है। दैनिक भास्कर ने 3 ऐसे युवाओं को खोजा, जो डिग्री से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, मगर माघ मेला में वो हर दिन अच्छी कमाई कर रहे हैं। ये लोग चाय भी बेच रहे हैं और दूध की सप्लाई भी कर रहे हैं। तीन कहानी पढ़िए… 1. संदीप, एमटेक 2 भाई पुलिस में, एक इंजीनियर, बोले- नौकरी पसंद नहीं आई हम माघ मेला क्षेत्र में संगम थाने के सामने एक चाय की दुकान पर पहुंचे। यहीं हमारी मुलाकात संदीप से हुई। बातचीत में पता चला कि संदीप प्रयागराज के नैनी के शुआट्स एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एमटेक कर चुके हैं। संदीप ने बताया कि मैं अंबेडकरनगर का रहने वाला हूं। हम चार भाई हैं, इसमें 2 भाई दिल्ली पुलिस में हैं, जबकि तीसरा भाई इंजीनियर है। वो आगे बताते हैं- पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए ऑफर तो आए लेकिन नौकरी नहीं भायी। पिता की डेढ़ साल पहले डेथ हो गई थी, फिर मैंने खुद का बिजनेस शुरू करने का प्लान बनाया। एक दोस्त हैं, जिनकी डेयरी है, बस वहीं से दूध की सप्लाई का काम शुरू किया। माघ मेले में सिर्फ दूध नहीं, बल्कि सेवा भाव के साथ आया हूं। 2. मोहित, बीटेक बीटेक के बाद मोहित बन चाय वाला मोहित जौनपुर के रहने वाले हैं। वो बताते हैं कि बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से बीटेक किया है। कोरोना काल में कोई काम नहीं सूझा तो हमने चाय का काम शुरू कर दिया। हम गुड़ वाली स्पेशल चाय बनाने लगे, चाय लोगों को पसंद आ गई। जौनपुर, प्रयागराज के कौड़िहार और आजमगढ़ में हमने चाय के ठेले लगाए। अब माघ मेले में हमने यह शुरुआत की है। उन्होंने कहा– हमारे देश में इंजीनियर की कमी तो है, इसलिए हमने बीटेक भी किया था लेकिन बाद में नौकरी करने का इरादा बदल गया। इस काम में हमार साथ 22 लड़के जुड़े हैं। उनके परिवार भी इसी काम से चल रहे हैं। आने वाले दिनों में इस चाय को एक ब्रांड बनाने का टारगेट लेकर काम कर रहे हैं। 3. पूनम, ग्रेजुएट बोल्ड लगाया ग्रेजुएट चाय वाली, कहा- सेवाभाव से कर रही हूं
दो लोगों से बातचीत करते हुए हमारी टीम माघ मेला क्षेत्र में ओल्ड जीटी रोड पर पहुंची, यहां लिखा था ‘ग्रेजुएट चाय वाली’। इस चाय की दुकान पर काम कर रही लड़की का नाम पूनम है। पूनम ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है। कहती हैं- 3 महीने पहले ही पति की मौत हो गई। दो बच्चे हैं। माघ मेला लगा तो हमें लगा यहां बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं, क्यों न यहीं से किसी काम की शुरुआत की जाए। बस चाय की दुकान खोल दी। पूनम कहती हैं- माघ मेले में सेवा का एक भाव लेकर आई हूं। गंगा मैया की गोद में रहकर कुछ बेहतर करने का प्रयास किया। हमने पूछा- आप लड़की है, ये काम करने में दिक्कत नहीं हुई। वह कहती हैं- चाय की दुकान शुरू करने पर सगे संबंधियों ने पहले असहमति जताई, लेकिन हमने इस काम को करने का फैसला कर लिया था। इसके बाद सब राजी हो गए। तब यह काम शुरू कर सकी हूं। चाय का नाम ग्रेजुएट चाय वाली.. क्यों रखा? इस पर पूनम कहती हैं यह नाम थोड़ा यूनिक लगा। इसके साथ ही लोगों को यह पता चलेगा कि मैं ग्रेजुएट भी हूं, ताकि लोग अच्छे से पेश आएं। साथ ही मैंने क्वालिटी भी मेनटेन की है। ….


