माता चामुंडा मंदिर गर्भगृह में आरती पर रोक का विरोध:हिंदू संगठनों ने देवास कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, पारंपरिक दर्शन बहाल करने की मांग

देशभर में प्रसिद्ध देवास स्थित माता चामुंडा टेकरी मंदिर के गर्भगृह में पारंपरिक आरती और दर्शन पर प्रतिबंध लगाने के विरोध में हिंदू समाज में आक्रोश व्याप्त है। भारत तिब्बत समन्वय संघ, देवास (मालवा प्रांत) ने इस रोक के खिलाफ शुक्रवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। बताया गया कि प्राचीनकाल से चामुंडा माता मंदिर के गर्भगृह में नियमित और पारंपरिक रूप से आरती होती आ रही है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह से कलेक्टर के आदेश का हवाला देते हुए पुजारियों द्वारा भक्त मंडल को गर्भगृह के बाहर से आरती करने को कहा जा रहा है और आरती के दौरान भक्तों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। कोरोना काल में लगाई गई थी रोक
संघ ने आरोप लगाया कि कोरोना काल के दौरान गर्भगृह में दर्शन अस्थायी रूप से बंद किए गए थे, लेकिन वर्षों बाद भी आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में दर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके साथ ही, बाहर से आने वाले दर्शनार्थियों से राशि लेकर विशेष पूजा व दर्शन कराने और नारियल चढ़ाने की पुरानी व्यवस्था समाप्त करने पर भी आपत्ति जताई गई। संघ ने यह भी बताया कि पुजारी भक्तों द्वारा प्रसादी के रूप में चढ़ाए जाने वाले नारियल को फोड़ने की बजाय पूरा ही रख लेते हैं, जिसे बाद में प्रसाद बेचने वाले व्यापारियों को बेच दिया जाता है। पारंपरिक आरती की अनुमति की मांग
भारत तिब्बत समन्वय संघ की मांग है कि भक्त मंडल द्वारा की जाने वाली पारंपरिक आरती को पुनः गर्भगृह से करने की अनुमति दी जाए। साथ ही, सभी श्रद्धालुओं को समान रूप से गर्भगृह में दर्शन का अधिकार मिले और मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाई जाए। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ही इस मामले में संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई नहीं की, तो भारत तिब्बत समन्वय संघ समस्त हिंदू समाज एवं धार्मिक संगठनों के साथ आंदोलन करने को विवश होगा। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की रहेगी। ज्ञापन का वाचन संघ के जिला महामंत्री जयदेव वर्मा ने किया।

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