मानव तस्करी के खतरों और सुरक्षा की जानकारी दी:स्कूलों में चलाया जागरूकता अभियान, बच्चों को शिकायत करने के लिए किया प्रेरित

राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस पर जिला प्रशासन, बाल अधिकारिता विभाग, नेहरू युवा केंद्र और एक्शन एड-यूनिसेफ ने मिलकर गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल मामचारी में जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इसी तरह के शिविर गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल ईनायती और गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल मासलपुर में भी आयोजित किए गए। एक्शन एड-यूनिसेफ के जिला समन्वयक दिनेश कुमार बैरवा ने बताया कि मानव तस्करी एक गंभीर वैश्विक अपराध है, जो दुनिया भर में लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार मानव तस्करी के शिकार हर पांच व्यक्तियों में से एक बच्चा है और कुल पीड़ितों में दो-तिहाई महिलाएं हैं। शिविर में बताया गया कि मानव तस्करी कई रूपों में होती है, जिसमें यौन शोषण, बाल यौन शोषण, जबरन मजदूरी, ऋण बंधन, घरेलू दासता और बाल सैनिकों की अवैध भर्ती शामिल है। यह अपराध न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि समाज की नींव को भी कमजोर करता है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को इस गंभीर अपराध के प्रति सचेत करना और उन्हें सुरक्षित रहने के तरीके बताना था। विशेषज्ञों ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े कानून और नीतियां बनाई जा रही हैं। साथ ही जागरूकता ही इस अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। कुछ माता-पिता बच्चों को सड़क पर भीख मांगने या सामान बेचने के लिए मजबूर करते हैं। कुछ अपनी बेटियों को कर्ज चुकाने, समुदायों के बीच विवादों को सुलझाने या अपने परिवारों का समर्थन करने के लिए विवाह या बाल यौन तस्करी के लिए बेच देते हैं या मजबूर करते हैं। भारत में वर्ष 2019 में सरकार ने 5145 मानव तस्करी के पीड़ितों और 2505 मानव तस्करी के संभावित पीड़ितों की पहचान किए जाने की जानकारी दी, जोकि वर्ष 2018 में पहचान किए गए 3946 मानव तस्करी पीड़ितों और 1625 मानव तस्करी के संभावित पीड़ितों की तुलना में वृद्धि थी। इसके आगे भी मानव तस्करी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। समाज में आज भी लड़के एवं लड़की को लेकर संकीर्ण एवं अमानवीय सोच व्याप्त है, राष्ट्रीय मानव तस्करी जागरूकता दिवस मनाते हुए हमें इस गुलामी एवं अभिशाप से मुक्ति में लगे संगठनों को मदद करनी चाहिए। हमें इस गुलामी को खत्म करने के लिए स्वयं आगे आना चाहिए। आज मानव तस्करी के बारे में बहुत सारी भ्रांतियाँ हैं, इसलिए खुद को शिक्षित करें और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करें। मानव तस्करी को रोकने के लिए प्रत्येक जिले में मानव तस्करी विरोधी यूनिट स्थापित की हुई है। स्वयंसेवक रामेश्वर जाटव, कृष्णा शर्मा, बर्षा देवी और विजेंद्र बैरवा ने मानव तस्करी संबंधित मामलों की शिकायत 1098 पर एवं नजदीकी पुलिस थाना पर देने के लिए छात्राओं को प्रेरित किया गया।

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