मानसिक-शारीरिक क्रूरता के आधार पर 32 साल पुराना शादी रद्द:फैमली कोर्ट ने कहा-पति को माता-पिता से अलग करना, संपत्ति का लालच,मुकदमें दर्ज करना क्रूरता

जयपुर की फैमली कोर्ट ने मानसिक-शारीरिक क्रूरता और अभित्यजन (बिना किसी कारण अलग रहना) के आधार पर 32 साल पुरानी शादी को रद्द कर दिया। जयपुर महानगर-प्रथम की फैमली कोर्ट-1 ने पति की विवाह विच्छेद (तलाक) की याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिए। अदालत ने कहा कि मानसिक क्रूरता के लिए कोई एक घटना प्रर्याप्त नहीं होती हैं। इसके लिए क्रमवार घटित घटनाओं के प्रभाव को देखा जाना चाहिए। इस प्रकरण में पत्नी द्वारा पति पर माता-पिता से अलग रहने का दवाब बनाना, संपत्ति का लालच और पति के खिलाफ अनेकों मुकदमें दर्ज करना क्रूरता की श्रेणी में आता हैं। वहीं दोनों पिछले 8 सालों से अलग-अलग रह रहे हैं। ऐसे में दोनों के बीच पिछले 8 सालों में दाम्पत्य संबंध भी स्थापित नहीं हुए हैं। पत्नी ने मानसिक-शारीरिक क्रूरता की
मामले से जुड़े अधिवक्ता डीएस शेखावत ने बताया कि सवाईमाधोपुर के रहने वाले युवक और मुंबई की रहने वाली युवती की शादी साल 1994 में हुई थी। पति के अनुसार पत्नी शादी के कुछ माह बाद ही पत्नी अपने मायके मुंबई चली गई। वहां से वापस आने के बाद माता-पिता से अलग रहने का दवाब बनाने लगी। जिसके बाद पति, पत्नी को लेकर जयपुर आ गया। यहां साल 2005 में खुद का मकान भी ले लिया। लेकिन पत्नी लगातार पारिवारिक संपत्ति में से हिस्सा लेने का दवाब बनाती। बात नहीं मानने पर दोनों बच्चों को जहर देकर आत्महत्या करने की धमकी देती। विवश होकर पति ने अपने पैतृक संपत्ति के दो मकान की पावर ऑफ अटॉर्नी पत्नी के नाम कर दी। जिसमें से पत्नी ने एक प्लॉट अपनी बहिन को दे दिया। पत्नी द्वारा पति के खिलाफ 9 मुकदमें दायर कर रखे हैं। जिसमें से 5 सिविल और 4 क्रिमिनल नेचर के हैं। कोर्ट ने कहा कि पति ने जो भी आरोप अपनी पत्नी पर लगाए है, उन्हें साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर साबित किया है। सास से मुधर संबंध, फिर भी मुकदमा
वहीं, पति के आरोपों पर पत्नी ने कहा कि उसके सास-ससुर से मधुर संबंध थे। पति की अपने पिता से नहीं बनती थी। इसलिए उन्हें अपने व्यवसाय में शामिल नहीं करके अलग कर दिया था। इसलिए वह सवाईमाधोपुर छोड़कर जयपुर आ गए थे। उसने कभी सास-ससुर का अपमान नहीं किया, उल्टा सास-ससुर पति से ज्यादा उस पर विश्वास करते थे। अदालत ने कहा कि एक तरफ पत्नी कहती है कि उसके सास के साथ मधुर संबंध थे। वहीं दूसरी ओर घरेलू हिंसा के मामले में अपनी सास के खिलाफ क्रूरता की बात कहती हैं। अगर उसके सास-ससुर उस पर अधिक विश्वास करते थे तो उसे अपनी सास को कोर्ट में साक्ष्य के रूप में पेश करना चाहिए था। अदालत ने कहा कि पत्नी, पति द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन नहीं कर पाई हैं ना ही अपने समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य दे सकी है। वहीं दोनों ने इस बात को स्वीकार किया है कि वह अक्टूबर-2017 से अलग-अलग रह रहे हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *