मार्गशीर्ष पूर्णिमा 15 दिसंबर को है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना की जाएगी। चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना गया है। मान्यता है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी मां की श्रद्धा के साथ पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति रहती है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा 14 दिसंबर शनिवार के दिन शाम 4.58 बजे से शुरू होगी और रविवार 15 दिसंबर को दोपहर 2.31 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा 15 दिसंबर को मान्य होगी और इसी दिन पूर्णिमा व्रत और दान स्नान किया जाएगा। पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय शाम 5.14 बजे होगा। श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के पुजारी पंडित जय शंकर के अनुसार पूर्णिमा के दिन विधि-विधान से श्री लक्ष्मी-नारायण की एक साथ में पूजा करनी चाहिए। इस दिन विष्णु भगवान को पीले रंग के फल, फूल और वस्त्र चढ़ाने चाहिए और लक्ष्मी माता को गुलाबी या लाल रंग के फूल और शृंगार का सामान चढ़ाना चाहिए। वहीं, मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण की कथा पढ़ना पुण्यदायक माना जाता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है। वहीं, अगर आप नदी में स्नान नहीं कर सकते तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर घर में ही स्नान करें। ब्रह्म मुहूर्त 5.17 बजे से 6.12 बजे तक, अभिजित मुहूर्त 11.56 बजे 12.37 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजे से 2.41 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 5.24 बजे 5.51 बजे तक, सायाह्न संध्या 5.26 बजे से 6.48 बजे तक, अमृत काल 6.06 बजे से 7.36 बजे तक, निशिता मुहूर्त 11.49 बजे से 12. 44 बजे तक। पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में नदी में स्नान करने का विशेष महत्व


