रांची| स्वाध्याय सारथी विद्वत अंकित जैन शास्त्री ने शुक्रवार को कहा कि दशलक्षण महापर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म है। उन्होंने कहा कि मृदुता, कोमलता विनम्रता का भाव मार्दव है। मार्दव धर्म एक ऐसा गुण है, जो किसी व्यक्ति के व्यवहार में कोमलता, विनम्रता और संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह न केवल व्यक्तिगत संबंधों को सुदृढ़ करता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सद्भावना को भी बढ़ावा देता है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक और व्यस्त जीवन में जहां कठोरता और आत्मकेंद्रितता बढ़ रही है, वहीं उत्तम मार्दव की भावना हमें मानवीय मूल्यों की ओर लौटने की प्रेरणा देती है। यह गुण विशेष रूप से नेतृत्व, सेवा, और संवाद के क्षेत्र में अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह दूसरों के दृष्टिकोण को समझने और उनके साथ सहयोग करने की शक्ति प्रदान करता है। रांची स्थित दोनों मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। श्रद्धालुओं से मंदिर खचाखच भरा था। अपर बाजार जैन मंदिर के बड़े हॉल में सामूहिक पूजन संगीतमय तरीके से वाद्य यंत्रों द्वारा की गई। श्रराजेंद्र कुमार, संजय कुमार बड़जात्या परिवार और टिकमचंद संजय कुमार छाबड़ा परिवार ने अपर बाजार मंदिर में शांतिधारा की। संगीतमय पूजन हेमंत सेठी, आकाश सेठी, संजय पाटनी, राकेश काशलीवाल के द्वारा एवं मंडल पूजन प्रमोद झांझरी, विनोद झांझरी के सहयोग से संपन्न हुआ।


