मासूम की मां का सवाल- मेरा बेटा कौन लौटाएगा:इंदौर में दूषित पानी से मरने वालों के परिजन बोले- हम नर्क में रहते हैं

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 150 से ज्यादा प्रभावित अस्पतालों में भर्ती हैं। भागीरथपुरा की गलियों में जब घूमते हैं तो ये संख्या कहीं ज्यादा महसूस होती है। तंग गलियां, घरों के पीछे खुले पड़े चैंबर और उनसे उठती असहनीय बदबू.. ये वो भयावह तस्वीर है जिसमें भागीरथपुरा के सैकड़ों परिवार जीने को मजबूर हैं। पिछले पांच दिनों से भागीरथपुरा में स्वास्थ्यकर्मी, नेता, नगर निगम के अधिकारियों का दौरा हो रहा है। हर कोई अस्पताल में भर्ती पीड़ित परिवारों से बात कर रहा है। भास्कर की टीम जब भागीरथपुरा की गलियों में पहुंचीं, तो हालात कई गुना खराब मिले। जिस भी घर में पूछा आपके यहां कोई बीमार है तो वह हमें किचन तक ले गया बोला- पानी उबाल कर पी रहे हैं। घर में सभी लोग बीमार हैं। जो अपनों को खो चुके हैं वहां मातम पसरा हुआ है। आखिर त्रासदी के तीन दिन बाद कैसे हैं भागीरथपुरा के हालात.. भास्कर ने इसका जायजा लिया… पढ़िए रिपोर्ट ​​जहरीले पानी से उजड़ी एक मां की दुनिया… इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक अध्याय पांच महीने का आव्यान साहू है, जो अब इस दुनिया में नहीं है। आव्यान ने ठीक से दुनिया को देखना और अपनी मां के चेहरे पर नजरें टिकाना ही शुरू किया था। वह मन्नतों का फल था, एक ऐसा चिराग जिसे साहू परिवार ने बड़ी उम्मीदों से जलाया था। मां साधना, जो एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं, अपने बेटे की सेहत का पूरा ख्याल रखती थीं। उसे बाहर का दूध पिलाती थीं, लेकिन वह गाढ़ा होता था, इसलिए उसमें थोड़ा पानी मिला देती थीं। कौन जानता था कि ये पानी उसके बच्चे के लिए जहर बन जाएगा। दो-तीन दिन पहले आव्यान को दस्त लगे। परिवार ने इसे सामान्य मानकर चाइल्ड स्पेशलिस्ट को दिखाया, दवाइयां शुरू हुईं, लेकिन मासूम की हालत बिगड़ती गई। वह सुस्त रहने लगा। घबराए हुए माता-पिता उसे प्राइवेट अस्पताल ले गए। वहां, सुबह के पांच बजे डॉक्टरों के शब्द उनके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतरे – ‘ही इज नो मोर।’ बिलखते हुए बोलीं- घर में सभी लोग बीमार हैं
भास्कर की टीम जब आव्यान के घर पहुंची तो घर पर कोहराम मचा है। बेटे की मौत को 24 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, और मां साधना के मुंह में अन्न का एक दाना नहीं गया है। उनकी आंखें पथरा गई हैं, किसी को भी देखती हैं तो बस रोने लगती हैं। वह बिलखते हुए कहती हैं, ‘घर में सभी लोग बीमार हैं। अब अधिकारी कह रहे हैं कि पानी उबाल कर पियो। पहले कहां थे ये सब? अपने बेटे को खो चुकी साधना रोते-रोते बेसुध हो जाती हैं। वह बताती हैं, ‘मेरी सास, मेरे पति, घर आए मेहमान, सब बीमार हैं। सिर्फ हमारा घर नहीं, यहां कई घरों में बच्चों की तबीयत खराब है। यह सब उस जहरीले पानी की वजह से हो रहा है।’ मंत्री, नेता और अफसरों का डेरा, घरों में मौत का अंधेरा भागीरथपुरा, लगभग दो-ढाई हजार परिवारों की एक घनी आबादी वाली कॉलोनी है। यहां पिछले तीन दिनों से माहौल तनावपूर्ण है। भास्कर की टीम जब यहां पहुंची तो चौकी के बाहर पुलिस का जमावड़ा था, तो पास ही नगर निगम कार्यालय और संजीवनी क्लिनिक में भी बीमारों की भीड़ थी। कोई अपने बच्चे को गोद में लिए भागा आ रहा था, तो कोई अपनी बूढ़ी मां को सहारा देकर। सबकी शिकायत एक ही थी – पेट में असहनीय दर्द और कमजोरी। एक तरफ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर सर्वे कर रही थीं और पानी उबालकर पीने की सलाह दे रही थीं, तो दूसरी तरफ एम्बुलेंस के सायरन की आवाजें गूंज रही थीं। दिनभर में 12 से 15 बार एम्बुलेंस मरीजों को लेकर अस्पतालों की ओर भागी। हालात: हर घर में कोई न कोई बीमार
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला भागीरथपुरा की गलियों में घुसते ही साफ हो जाता है। गली में हमें सतीश जंगले मिले। उन्होंने बताया, ‘मैं और मेरी पत्नी, दोनों के पेट में तीन दिन से भयानक दर्द है। जैसे कोई अंदर से काट रहा हो। अस्पताल से दवा लाए, कोई फर्क नहीं पड़ा। पानी इतना खराब आता है कि पहली दो-तीन बाल्टी काली निकलती है। उसे फेंकने के बाद जो पानी आता है, वह भी साफ नहीं होता। उन्होंने अपने किचन की ओर इशारा किया जहां गैस पर पानी उबल रहा था। पतली सी गली में एक घर के बाहर ही चैंबर खुला था। अंदर पहुंचे तो कशीश नाम की एक युवती बेड पर लेटी थी। वह दो दिन पहले ही अस्पताल से घर लौटी थी। वजह: चैंबर की गंदगी कमरे तक आती है
यहां रहने वाली लक्ष्मीबाई गंदगी और बदबू से परेशान है। वह हमें अपने घर के पिछले हिस्से में ले गईं। बोलीं, ‘पीछे गली में चैंबर है, जो हमेशा खुला रहता है। उसकी सारी गंदगी बहकर मेरे घर में घुस जाती है। पूरा घर बदबू मारता है।’ हम वहां दो मिनट भी खड़े नहीं हो पाए। यह हाल तब था जब वह सफाई कर चुकी थीं। दीपक नाम के एक युवक ने हमें अपने घर के बाहर खुले पड़े चैंबर को दिखाया। उसने गुस्से में कहा, ‘कोई सफाई करने नहीं आता। आते भी हैं तो दादागिरी दिखाते हैं। ओवरफ्लो होता है तो पूरी गली में गंदगी फैल जाती है। आप बताइए, इस नर्क में कैसे रहें? मजबूरी है, कहीं जा भी नहीं सकते।’ भागीरथपुरा की एक हकीकत ये भी… सालभर से कोई न कोई बीमार रहता है यहां रहने वाली कामिनी कुमावत ने बताया, ‘गंदे पानी से सालभर कोई न कोई बीमार रहता है। अभी घर के सभी लोग बीमार हैं। मेरी सास ICU में भर्ती हैं। डर लगता है कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए। क्या हमें साफ पानी पीने का भी हक नहीं है?’ कामिनी के घर से बाहर निकले तो वहां नीलेश सरोदिया मिले। उन्होंने हमें अपने मोबाइल में एक वीडियो दिखाया। यह सुबह नल आने के समय का था। वीडियो में नल से गाढ़ा, काला पानी बह रहा था। नीलेश ने कहा, “देखिए, ऐसा पानी आता है। दो-तीन बाल्टी फेंकने के बाद पानी सफेद तो होता है, लेकिन जब उसे छानते हैं तो सफेद-सफेद कीड़े निकलते हैं। हम यह पानी पीने को मजबूर हैं।’ भागीरथपुरा की हर गली, हर घर में ऐसी ही दर्दनाक कहानियां दफन हैं। यह सिर्फ पानी का संकट नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के मरने और प्रशासनिक लापरवाही की जीती-जागती मिसाल है। एक तरफ अधिकारी मौत के आंकड़ों में उलझे हैं, तो दूसरी तरफ एक मां अपने पांच महीने के बच्चे की लाश के पास बैठी उस सिस्टम से पूछ रही है – “मेरा बेटा मुझे कौन लौटाएगा?” ये खबर भी पढ़ें… इंदौर में दूषित पानी से 14वीं मौत…1400 लोग इन्फेक्टेड:162 भर्ती; मृतकों के परिजन ने चेक लेने से मना किया, मंत्री विजयवर्गीय पर भड़की महिलाएं देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 14 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। 14वें मृतक का नाम अरविंद (43) पिता हीरालाल है। वह कुलकर्णी भट्टा का रहने वाला था। इससे पहले 21 से 31 दिसंबर तक 13 लोगों की मौत हो चुकी थी। गुरुवार सुबह मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा इलाके में पहुंचे। इस दौरान 7 मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपए के चेक दिए। परिजन ने मंत्री की मौजूदगी में नाराजगी जताते हुए कहा- हमें आपका चेक नहीं चाहिए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट..

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