धान खरीदी में कस्टम मिलिंग को लेकर राज्य सरकार और राइस मिलर्स के बीच चल रहे विवाद के बीच अब मिलर्स एसोसिएशन में दो फाड़ हो गया है। रविवार को मारे गए छापे के बाद रायपुर, दुर्ग, धमतरी समेत अलग-अलग जिलों के 13 राइस मिलर्स ने डिप्टी सीएम अरूण साव समेत तीन मंत्रियों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने लिखित बयान जारी करके कहा कि वे हड़ताल वापस ले रहे हैं और किसानों के हित में वे राज्य सरकार के साथ खड़े हैं। वहीं मिलर्स एसोसिशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं लेकिन यह प्रदेश के राइस मिलर्स के लिए ठीक नहीं है। सोमवार को मिलरों के एक गुट ने डिप्टी सीएम अरुण साव, खाद्यमंत्री दयालदास बघेल और स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से मुलाकात कर हड़ताल खत्म करने की घोषणा की। मिलर्स की ओर से कहा गया है कि उनकी मांगों को शासन ने संवेदनशीलता के साथ सुना और सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया है। वे सभी एकजुट हैं और शासन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किसी तीसरे पक्ष को दखल देने की जरूरत नहीं है। मिलर्स ने यह भी कहा कि प्रदेश में कुछ निहित स्वार्थी समूह लगातार किसान और मिलरों के विषय में भ्रम फैलाने में लगे थे। आज की बातचीत के बाद उस भ्रम का पूरी तरह से निवारण हो गया है। किसानों के हित में वे सरकार के साथ खड़े हैं। शासन द्वारा खरीदे गए धान का दाना-दाना मिलिंग करने प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले समय में उनकी मांगों को मंच देने के लिए राइस मिलर्स की संभागीय टीम बनाएंगे। छापे की कार्रवाई कर भय पैदा कर रहे हैं: अग्रवाल राइस मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार राइस मिलर्स पर कार्रवाई कर उन पर दबाव बना रही है। कार्रवाई कर भय पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि राइस मिलर्स के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है। मिलर्स कह रहे हैं कि ये गुंडागर्दी है। एक ओर हमारा पैसा नहीं दे रहे हैं और दूसरी ओर छापे भी मारे जा रहे हैं। एसोसिएशन की सरकार से अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है।


