मिलेट मिशन से 6682 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य

भास्कर न्यूज | गिरिडीह गिरिडीह जिले में इस वर्ष मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती में वृद्धि देखी जा रही है। जिलेभर में 1627 हेक्टेयर भूमि पर ज्वार, बाजरा और मडुआ जैसी फसलों की बुआई की गई है, जिनमें से मडुआ की खेती प्रमुख है। इस प्रयास के तहत जिले में 6682 किसानों को झारखंड मिलेट मिशन योजना के तहत जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का उद्देश्य ना केवल मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना है, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सशक्तीकरण के अवसर भी प्रदान करना है। जिला कृषि पदाधिकारी आशुतोष कुमार ने सभी कृषक मित्रों को निर्देश दिया है कि वे उन किसानों का रजिस्ट्रेशन मिलेट मिशन योजना में कराएं जिन्होंने मोटे अनाज की खेती की है। रजिस्ट्रेशन के बाद इन किसानों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत किसानों को प्रति एकड़ 3000 रुपए की सहायता राशि मिलती है। फील्ड सत्यापन की प्रक्रिया मिलेट मिशन योजना के तहत निबंधित किसानों के खेतों पर सत्यापन 1 सितंबर से 15 नवंबर तक किया जाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय सर्वेक्षकों द्वारा किसानों के खेतों का दौरा किया जाएगा और उनके रजिस्ट्रेशन की पुष्टि की जाएगी। इसके बावजूद जिला कृषि पदाधिकारी ने सभी किसानों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए ओटीपी कॉल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस मिशन के अंतर्गत ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं की जाती है। मोटे अनाज का महत्व मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा देने से कृषि में विविधता आती है और यह विशेष रूप से सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की आय स्थिर रखने में मदद करता है। मोटे अनाज न केवल खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देते हैं, बल्कि ये छोटे किसानों के लिए स्थायी आय का स्रोत भी बनते हैं। इसके अतिरिक्त, मिलेट्स की खेती और प्रसंस्करण से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलता है और रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं। मिलेट मिशन का योगदान केंद्र सरकार द्वारा इस मिशन की शुरुआत की गई है, ताकि मोटे अनाज की खेती को न केवल बढ़ावा दिया जा सके, बल्कि इसके सेवन को भी प्रोत्साहित किया जा सके। किसानों को सीधे लाभ होगा, अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी। अब तक 2269 िकसानों ने कराया रजिस्ट्रेशन 30 अगस्त तक जिले में 2269 किसानों ने मिलेट मिशन के तहत अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है। विभिन्न प्रखंडों से किसानों की भागीदारी देखी जा रही है, जैसे बगोदर से 161, बेंगाबाद से 33, बिरनी से 538, देवरी से 18, धनवार से 104, डुमरी से 84, गांडेय से 62, गांवा से 53, गिरिडीह से 437, जमुआ से 300, पीरटांड से 71, सरिया से 402 व तिसरी से 6 किसान शामिल हैं।

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