दो साल पहले मोतीनगर क्षेत्र में स्थित मीरा हॉस्पिटल में नाबालिग का प्रसव कराने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच व कार्रवाई से बाल अधिकार आयोग संतुष्ट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के बाद डॉ. मोनिका जैन को केवल चेतावनी देकर छोड़ने पर आपत्ति जताई है। साथ ही कलेक्टर से नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। बड़ी बात यह कि इस मामले में कार्रवाई कर रिपोर्ट बीते 7 महीने से मांगी जा रही है लेकिन आयोग को जवाब नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में आयोग के प्रशासनिक अधिकारी अब तक 5 पत्र कलेक्टर को भेज चुके हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से आयोग के लिए फरवरी में ही रिपोर्ट भेज दी गई थी। इस मामले में कलेक्टर को पहला पत्र 9 मई को भेजा गया है। इसमें पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा दिए प्रतिवेदन का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रकरण के संबंध में प्रतिवेदन आयोग द्वारा देखा गया। प्रतिवेदन के अनुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सागर द्वारा डॉ. मोनिका जैन की लापरवाही पाए जाने पर उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया गया। जांच समिति के अभिमत से आयोग सहमत नहीं है कि उन्हें केवल चेतावनी देकर छोड़ा जाए। चूंकि यह बाल तस्करी एवं नाबालिग पीड़िता से संबंधित गंभीर प्रकरण है। नियम एवं कानून के अनुसार मीरा हॉस्पिटल एवं डॉ. मोनिका जैन के विरुद्ध कार्यवाही कर आयोग को अवगत कराने का आग्रह है। निर्देशानुसार प्रकरण में की गई कार्यवाही की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट जल्द भेजी जाए। एसपी के प्रतिवेदन में बताया कि न्यायालय में है मामला पुलिस विभाग द्वारा भेजे पत्र में बताया है कि नाबालिग की मीरा हास्पिटल में ही ऑपरेशन से डिलेवरी कराने तथा रिकॉर्ड सीएमएचओ ऑफिस भेजने में आनाकानी करने के संबंध में प्रतिवेदन चाहा गया है। पूर्व में प्रतिवेदन प्रेषित किया गया था। थाना जैसीनगर के अपराध प्र 273/22 धारा 363, 365 धारा 372, 373, 376, 376(2) (एन) (जे) 342 ताहि. 3, 4, 5, 6, 13, 14, 16, 17 पॉस्को एक्ट के प्रकरण के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर प्रकरण की विवेचना पूर्ण होने पर चालान तैयार कर न्यायालय में पेश किया गया है। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। डॉ. मोनिका जैन संचालक मीरा हास्पिटल के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर उनके द्वारा कार्यवाही में लापरवाही पाई गई थी। स्वास्थ्य संचालनालय मप्र के पत्र क्र. अप्रशा/सेल/6/2011/1585 दिनांक 11.11. 2011 के आदेशानुसार डॉक्टर द्वारा उपचार में लापरवाही प्रकरणों पर चिकित्सकों के विरुद्ध कार्यवाही करने संबंधी दिशा निर्देश के अनुसार डॉक्टर मोनिका जैन द्वारा की गई लापरवाही की जांच के लिए प्रतिवेदन मय दस्तावेजों के सीएमएचआे कार्यालय से आया है। पत्र के साथ संलग्न है। इलाज करना पहली जिम्मेदारी डॉ. मोनिका जैन ने सीएमएचओ को दिए जवाब में बताया है कि पीड़ित आपातकालीन स्थिति में आई थी। इस कारण पहली जिम्मेदारी उसका इलाज था। उसके नाबालिग होने की जानकारी नहीं थी। आयोग से पत्र भेजे गए हैं इस मामले में बाल अधिकार आयोग सदस्य ओंकार सिंह ने बताया कि मामला मानव तस्करी व नाबालिग से संबंधित गंभीर प्रकरण है। केवल चेतावनी देकर छोड़े जाने लायक लापरवाही नहीं है। कलेक्टर से नियमानुसार कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।


