राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े विचारक और मीसाबंदी लखन लाल चौरसिया ‘बाबूजी’ का शुक्रवार सुबह रीवा में इलाज के दौरान आकस्मिक निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे और मुख्य नगरपालिका अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। परिजनों के अनुसार, बाबूजी को तीन दिन पहले बुखार आया था, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए रीवा ले जाया गया था। वे पूरी तरह स्वस्थ थे। उनका अंतिम संस्कार उनके गृहनगर महाराजपुर में कल (शनिवार) सुबह 10 बजे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। वे अपने पीछे चार बेटे (नरेंद्र, अनिल, प्रमोद, मुकेश) और एक बेटी सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। लखन लाल चौरसिया ‘बाबूजी’ को समाज के लिए अच्छा करने की धुन में रहने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वे महाराजपुर में जनसंघी दादा मातादीन चौरसिया (जो उनके चाचा थे) के विकल्प के रूप में पहचाने जाते थे। बाबूजी 15-15 दिनों तक अपने गुरु के सानिध्य में मौन व्रत भी रखते थे। उनका 80वां जन्मदिन 13 जनवरी को आने वाला था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जन्मदिन से दस दिन पहले हुए उनका निधन हो गया।


