मुंगेली जिले में मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान के तहत “मिशन 90 प्लस परीक्षा परिणाम उन्नयन कार्यक्रम” शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य शासकीय हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना तथा बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार लाना है। कलेक्टर कुन्दन कुमार ने इस अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए जिला पंचायत सभाकक्ष में प्राचार्यों और शिक्षा अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में कलेक्टर ने कमजोर प्रदर्शन वाले विद्यालयों की समीक्षा की। मनोहरपुर स्कूल की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए प्राचार्य संजीव निर्मलकर को संतोषजनक जवाब न देने पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण में लापरवाही और प्रगति पत्रक संधारित न करने के कारण सभी बीईओ एवं एबीईओ का वेतन रोकने का आदेश दिया गया। वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के निर्देश इसके अलावा शिक्षा गुणवत्ता में सुधार न लाने पर लालपुर, मनोहरपुर, लगरा, देवरहट, डोंगरिया, राम्हेपुर, बैगाकापा और गोड़खाम्ही स्कूलों के प्राचार्यों की वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने राम्हेपुर विद्यालय की प्राचार्य मरियम एक्का से आगामी परीक्षा में बेहतर परिणाम लाने पर चर्चा की। उन्होंने लालपुर थाना स्कूल के प्राचार्य सहित अन्य विद्यालयों को सर्वोत्तम प्रथाएं (बेस्ट प्रैक्टिस) अपनाकर परीक्षा परिणाम सुधारने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर ने सभी स्कूलों को अपने नवाचार साझा करने के स्पष्ट निर्देश दिए, ताकि जिले के सभी विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें। जिला शिक्षा अधिकारी को जिले के सभी विद्यालयों की सर्वोत्तम प्रथाओं का संकलित प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया गया। स्कूलों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने कहा सभी बीईओ और बीआरसी को स्कूलों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए कहा गया। कलेक्टर ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने हेतु तैयार कार्ययोजना की समीक्षा की और अनसॉल्व्ड पेपर तथा मॉडल पेपर की तैयारी गंभीरता से कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा गुणवत्ता बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्राचार्य शकुंतला के प्रयासों की सराहना भी की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने कहा कि परीक्षा पूर्व का समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि में शिक्षकों को स्मार्ट टीचर की भूमिका निभाते हुए नवाचार के माध्यम से विद्यार्थियों की सोच विकसित करने और उन्हें निरंतर प्रेरित करने की आवश्यकता है। जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय ने कहा कि सभी शिक्षक अपनी जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बेहतर कार्य करें। समीक्षा के दौरान बेहतर कार्य करने वाले विद्यालयों के प्राचार्यों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी एल.पी. डाहिरे, डीएमसी अशोक कश्यप् सहित सभी बीईओ, एबीईओ और स्कूलों के प्राचार्य मौजूद रहे।


