मुंगेली पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने बैंक खातों के दुरुपयोग के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई है। साइबर सेल की टीम ने पुलिस मुख्यालय रायपुर की तकनीकी सेल और साइबर अपराध समन्वय केंद्र के ‘समन्वय’ पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर जांच शुरू की। जांच में पता चला कि ठगों ने कई बैंक शाखाओं में 5.76 लाख रुपए का संदिग्ध लेनदेन किया था। बैंक खाते बेचे, साइबर ठगों ने किया इस्तेमाल मुंगेली के सिटी कोतवाली पुलिस ने 2 मार्च 2025 को 22 बैंक खाताधारकों के खिलाफ धोखाधड़ी और संगठित अपराध का मामला दर्ज किया। पूछताछ में पता चला कि संजीव जांगड़े ने अपना बैंक खाता, आधार कार्ड, एटीएम और मोबाइल नंबर ईश्वर घृतलहरे को 12,000 रुपए में बेच दिया। ईश्वर ने 10,000 रुपए कमीशन लेकर इसे सेवकराम साहू को बेचा। सेवकराम ने इसे 8,000 रुपए में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया। जांच में पता चला कि संजीव जांगड़े के खाते में 1.30 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। अन्य 22 खातों में कुल 4 करोड़ रुपए का लेनदेन सामने आया है। पुलिस अब इस मामले में और जांच कर रही है। खाते से ठगी के पैसों का ट्रांजैक्शन करते थे आरोपी पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें संजीव जांगड़े (35 वर्ष), ईश्वर सिंह घृतलहरे (47 वर्ष) और सेवकराम साहू (40 वर्ष) शामिल हैं। ये आरोपी बैंक खातों को साइबर ठगों को बेचकर कमीशन कमाते थे। इन खातों का उपयोग ठगी के पैसों को ट्रांसफर और निकालने के लिए किया जाता था। सबूतों के आधार पर 21 मार्च 2025 को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पुलिस अब अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है। क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिन्हें साइबर ठग किसी व्यक्ति को पैसे का लालच देकर हासिल कर लेते हैं। इन खातों में ठगी की रकम जमा की जाती है और फिर उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता है। ये खाते यूपीआई और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए मिनटों में बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।


