मुआवजा घोटाले में खुशाल-राजेश, SECL अधिकारियों पर FIR:9 करोड़ की धोखाधड़ी का केस दर्ज, CBI जांच के बाद कई लोग और अधिकारी संलिप्त

SECL और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर आर्थिक आपराधिक षड्यंत्र रचने के आरोप में खुशाल जायसवाल और राजेश जायसवाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इसी मामले में SECL के अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर भी समान धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। सीबीआई टीम ने हाल ही में मलगांव और रलिया गांवों का दौरा कर जांच आगे बढ़ाई है। दरअसल, ACB-CBI को मिली शिकायतों की जांच में पता चला कि कुछ लोगों ने SECL के उन अधिकारियों के साथ मिलकर (जो जमीन के असली मालिक तय करने वाली समितियों में थे) सरकार को 9 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान पहुंचाया। 1.60 करोड़ रुपए से अधिक मुआवजा हड़पने का आरोप जांच में यह भी सामने आया कि खुशाल जायसवाल ने सरकारी जमीन पर बने घरों के नाम पर 1 करोड़ 60 लाख रुपए से ज्यादा का मुआवजा ले लिया। जानकारी के मुताबिक, खुशाल जायसवाल ने मलगांव और अमगांव में सरकारी या दूसरों की जमीन पर बने घरों के नाम पर, खुद और अपने परिवार के करीबियों के नाम से 7 से ज्यादा बार मुआवजा लिया। बिना पात्रता जांच के बाद में बने घरों को भी मुआवजा देने का खुलासा इस तरह उन्होंने 1 करोड़ 83 लाख रुपए से अधिक की रकम प्राप्त की। जांच में यह भी पता चला कि कई मामलों में बिना पात्रता जांच किए बाद में बनाए गए घरों के लिए भी मुआवजा दे दिया गया। SECL में मुआवजा पाने के लिए जरूरी था कि घर, कुएं, पेड़ जैसी संपत्तियां 2004, 2009 या 2010 में जारी हुए नोटिफिकेशन से पहले बनी हों। नोटिफिकेशन से पहले बनी संपत्तियों को ही मिलता था मुआवजे का अधिकार इन्हीं तारीखों से जमीन राज्य या केंद्र सरकार के नाम पर गई थी। अगर संपत्ति इन तिथियों के बाद बनाई गई हो, तो वह मुआवजे के लिए योग्य नहीं मानी जाती। खुशाल जायसवाल, राजेश जायसवाल, एसईसीएल के कुछ अज्ञात अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। जायसवाल भाइयों और अधिकारियों पर केस दर्ज उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (साजिश), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला बनाया गया है। फिलहाल पुलिस/एजेंसी इस मामले की आगे जांच कर रही है।

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