मुआवजा बांटने में किया जा रहा फर्जीवाड़ा:जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार साबित, नहीं कराई थी एफआईआर, रिपोर्ट में जमीन दलाल का भी जिक्र

भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का खुलासा 2021 में ही हो जाता, अगर रिपोर्ट दबाई नहीं जाती। ये रिपोर्ट अपर कलेक्टर बीसी साहू ने बनाई थी। इस रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया था कि मुआवजा बांटने में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। 2021 से 2023 के बीच 3 अलग-अलग गांवों की तीन रिपोर्ट पेश की गई। लेकिन इस मामले में एफआईआर तो दूर, विभागीय जांच तक नहीं की गई। उस समय कलेक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे थे। आगे की कार्रवाई की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। अगर समय पर कार्रवाई की जाती तो मुआवजे के नाम पर हुए भ्रष्टाचार को रोका जा सकता था। तीनों रिपोर्ट को दबाने से हुआ ये कि मुआवजे की मिली रकम किसानों के खातों से निकलकर दलालों और अफसरों की जेब में पहुंचती रही। जानिए क्या था जांच रिपोर्ट में भारतमाला प्रोजेक्ट में मुआवजा घोटाले की शिकायत सबसे पहले 2021 में कृष्णकांत साहू ने की थी। उनकी जांच पर तत्कालीन अपर कलेक्टर बीसी साहू को जांच अधिकारी बनाया गया। उन्होंने एक के बाद एक तीन अलग-अलग रिपोर्ट पेश की। इधर रिपोर्ट बनती रही, गोलमाल भी होता रहा दैनिक भास्कर को मिले दस्तावेजों से यह प्रमाणित हो रहा है अभनपुर के गांवों की जमीन का सबसे ज्यादा नामांतरण 2022 में किया गया है। यानी 2021 में जांच रिपोर्ट आने के बावजूद भ्रष्टाचार होता रहा। ये फर्जीवाड़ा 2023 तक जारी रहा। यानी बैक डेट पर भी नामांतरण किया गया और मुआवजे के लिए फाइलें दौड़ती रहीं। रायपुर में फर्जीवाड़े की रकम के साथ महासमुंद और धमतरी में हुए घोटाले की राशि जोड़ने पर यह आंकड़ा 200 करोड़ के पार हो रहा है। ईओडब्ल्यू को जांच के दौरान हर दिन चौंकाने वाली जानकारी मिल रही है। जब मर्जी हो ट्रांसफर करवा देता खनूजा तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के बीच कामकाज का बंटवारा करने के साथ ही कौन सा पटवारी कहां रहेगा यह जिले के कलेक्टर ही तय करते हैं। लेकिन प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीनों के मामले में जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा का इतना दबदबा था कि किसी भी अफसर का ट्रांसफर करवा देता था। वो अपनी मर्जी से अभनपुर ही नहीं आरंग और मंदिरहसौद में भी अफसरों की नियुक्ति करवाता। जो भी अफसर साथ नहीं देता उसका इलाका बदल दिया जाता। कलेक्टोरेट के कई अफसरों को इसकी जानकारी थी। लेकिन किसी ने भी उसके खिलाफ कभी कुछ नहीं कहा।
रिपोर्ट पेश होने के बाद क्या हुआ इसका सार कुछ ऐसा था भारतमाला प्रोजेक्ट मुआवजा मामले में जैसे ही शिकायत मिली, मैंने जांच कराई थी। तत्कालीन अपर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई भी होनी थी। बाद में मेरा ट्रांसफर हो गया। इस वजह से जांच रिपोर्ट में आगे क्या किया गया मुझे जानकारी नहीं है।- डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे, तत्कालीन कलेक्टर रायपुर

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