बंडा की उल्दन बांध परियोजना की मुआवजा सूची में जिंदा पति को मृत और उनकी पत्नियों को विधवा बता दिया। 2610.54 करोड़ रुपए की लागत की परियोजना में ग्रामीणों को सही ढंग से मुआवजा न देना पड़े और उन्हें सूची सुधरवाने बार-बार बंडा अनुविभागीय कार्यालय आना पड़े। इसलिए सूची में इस तरह की गड़बड़ी की जा रही है।
उल्दन गांव के पास बनने वाले बांध से क्षेत्र के 28 गांव डूब रहे हैं। पिपरिया इल्लाई गांव में 15 दिन पहले ही मुआवजा सूची पहुंची है। जिसमें इस तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। बंडा (उल्दन) बांध परियोजना लागत: 2610.54 करोड़
डूब क्षेत्र: 3756 हेक्टेयर
सिंचित क्षेत्र: 80 हजार हेक्टेयर
प्रभावित गांव: 28 पत्नी को विधवा, पति को बताया मृत ये हैं पिपरिया इल्लाई गांव के हीरालाल अहिरवार। गांव की मुआवजा सूची के मुताबिक ये मर चुके हैं और पत्नी विधवा हो गई लेकिन ऐसा नहीं है। हीरालाल जिंदा हैं और खेत पर चौकीदारी का काम करते हैं। उल्दन बांध परियोजना में पिपरिया इल्लाई गांव में हीरालाल का मकान डूब में जा रहा है। सर्वे करने वाले अफसरों ने सूची में हीरालाल की पत्नी हल्लीबाई को बेवा (विधवा) लिखा है। आदिवासी शिबू को भी बताया मृत पिपरिया इल्लाई के शिबू रावत (आदिवासी) भी जिंदा हैं लेकिन मुआवजा सूची में अफसरों ने इन्हें भी मार दिया। सूची में इनकी पत्नी विफत रानी को बेवा (विधवा) लिखा है। दो दिन पहले सरपंच के पास शिबू ने जैसे ही सूची देखी वे दंग रह गए। शिबू को अपनी दो बेटियों की शादी भी करना है। सूची में मृत होने से उन्हें विस्थापन के 6.36 लाख रुपए नहीं मिल पाएंगे। सर्वे में रहे मौजूद फिर भी सूची में नहीं आया नाम… गांव के त्रिभुवन अहिरवार ने बताया कि मुआवजा सूची में मेरे पिता मिट्ठू लाल अहिरवार का नाम नहीं आया। सर्वे के दौरान वे मौजूद थे और मकान के साथ उनका फोटो भी लिया लेकिन इसके बाद भी अफसरों ने नाम हटा दिया। दो-तीन दिन पहले गांव में जब लिस्ट आई तब उन्हें पता चला। नाम न आने से विस्थापन का पैसा नहीं मिल पाएगा। अब वे पिता का नाम जोड़ने के लिए गुहार लगाएंगे। सीधी बात – गगन बिसेन, एसडीएम बंडा Q उल्दन बांध परियोजना में सर्वे में ग्रामीणों के नाम छूट गए हैं?
– दावे आपत्तियां प्रस्तुत करने का ग्रामीणों के पास गुरुवार तक का समय था। जो आई हैं जांच के बाद निराकरण किया जाएगा। Q जिनके पति जिंदा हैं सूची में उन महिलाओं को बेवा लिखकर विधवा बता दिया?
– टाइपिंग में कुछ त्रुटि के कारण ऐसा हो गया होगा। मैं चैक करवा लेता हूं। Q ग्रामीणों का कहना है सुधार के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाए जाते हैं?
– ऐसा नहीं है तुरंत सुनवाई कर समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं। Q जो रह गए हैं उन्हें मुआवजा कब तक मिल जाएगा?
ये बड़ी परियोजना है। क्लोजर रिपोर्ट की जानकारी जल संसाधन विभाग के अधिकारी दे पाएंगे।


