मुक्तिधाम की भूमि पर कब्जा: मामले में 5 साल बाद अपने बयान से पलटा गवाह

भास्कर न्यूज | मनेंद्रगढ़ मुक्तिधाम की जमीन पर अतिक्रमण का विरोध करने पर जानलेवा हमले का शिकार हुए रमाशंकर गुप्ता के केस में 5 वर्ष बाद 12 मई 2025 को एक नया मोड़ आया है, जिसमें शपथ-पत्र पर पुलिस से लेकर उच्च न्यायालय तक केस की वास्तविकता बताने वाला एकमात्र व्यक्ति अपने कथन से पलट गया है। ऐसे में चर्चा है कि उक्त व्यक्ति पहले सच बोल रहा था या किसी के दबाव में उसने अपना कथन बदला है। मुक्तिधाम की जमीन के लिए लड़ने वाले रमाशंकर ने बताया कि मनेंद्रगढ़ में मुक्तिधाम के लिए तात्कालीन राजा कोरिया ने 6.98 एकड़ जमीन 1944 से आरक्षित की हुई है। उक्त जमीन के अंश भाग पर वर्ष 2000 के बाद से अतिक्रमण की बाढ़ आ गई है, जिसका विरोध वे वर्ष 2006 से लगातार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसे लेकर उनके ऊपर प्राणघातक हमला तक हो चुका है। उन्होंने कहा कि इसी मामले में केस की वास्तविकता बताने वाला मात्र एक व्यक्ति अश्विनी सिंह, जिसने शपथ पत्र के माध्यम से 5 जनवरी 2021 से पुलिस से लेकर उच्च न्यायालय तक शपथ पत्र प्रस्तुत कर जानलेवा हमले की पूरी वास्तविकता बताई है। यही नहीं, अश्विनी सिंह द्वारा 12 मई 2025 को भी वही शपथ पत्र न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए निष्पादित किया गया है, लेकिन अचानक से अब उसने अपना कथन बदल दिया है। ऐसे में रमाशंकर गुप्ता का कहना कि अश्विनी सिंह पहले शपथपूर्वक सच बोल रहे थे या अब उनके द्वारा न्यायालय में दिया गया कथन सच है। शपथ पत्र पर दिए कथन को गवाह के रूप में देना बताया अश्विनी सिंह का कहना है कि 12 मई को कोर्ट में दिए गए उनके कथन को सही माना जाए। पूर्व में शपथ पत्र पर दिए गए कथन के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें पहले इस मामले में मुलजिम बना दिया गया था, जबकि वे गवाह थे।

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