पाई-पाई जोड़ लोग एक अदद छत खरीदते हैं, लेकिन दो साल में ही उन फ्लैट के नल फीटिंग से लेकर फर्श, प्लास्टर, खिड़की-दरवाजे, छत, बीम, दीवारें दरकने, गिरने लगे तो ऐसे बाशिंदों पर क्या बीतती होगी? वह भी तब जब उनमें से ज्यादातर के पास दूसरे मकान खरीदने की हैसियत न हो और इस ‘धोखाधड़ी’ को सुनने के लिए सिस्टम बहरा बन गया हो। बाद में हाईकोर्ट जाना पड़े। यह हाल मुख्यमंत्री जनआवास योजना में सरकारी फायदे लेकर बनी हाईराइज बिल्डिंग का है। हाईकोर्ट ने निर्मित आवासों के निर्माण में ‘क्वालिटी कंट्रोल रिपोर्ट’ मांगी है। रसूख की बदौलत 2 माह तक जांच की भी टालमटोल चलती रही। आखिरकार कोर्ट का दबाव देख हाल ही 4 एक्सपर्ट ने बिल्डिंग के अलग-अलग हिस्सों की जांच करके जो रिपोर्ट तैयार की। मामला ‘श्री आश्रय गोल्ड आवासीय योजना’ नींदड़ का है। कमेटी ने बिल्डिंग के नमूने परीक्षण एनएबीएल मान्यता प्राप्त लैब में कराए हैं। रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जा चुकी है। गोपनीय जांच रिपोर्ट का सच (अव्वल तो प्रोजेक्ट के निर्माण में डिजाइन, कोई विशेष विवरण और गुणवत्ता नियंत्रण से संबंधित रिकॉर्ड न तो ठेकेदार की साइट पर मिला और न ही जेडीए में। इसके बाद अल्ट्रासाउंड पल्स वेलोसिटी परीक्षण से स्पष्ट हुआ) अलग-अलग हिस्सों की लैब जांच में ये खुलासे 17 अप्रैल को हाई कोर्ट ने जांच रिपोर्ट मांगी, अब 4 माह में बाहर आया सच घटिया निर्माण के मसले पर हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को रिपोर्ट मांगी थी। कमेटी में पूर्व निदेशक सैन्य इंजीनियरिंग सेवा के बीपी जैन, एसई विवेक शर्मा, एसई भवानी सिंह और एक्सईएन जेडीए संदीप गुप्ता शामिल थे। कमेटी की गोपनीय रिपोर्ट भास्कर के पास है। बिल्डिंग निरीक्षण में आया कि स्कीम में 160 फ्लैट 2 बीएचके के हैं। इनकी कीमत 14 लाख तय हुई थी। वहीं 72 फ्लैट सिंगल बीएचके हैं। इनकी कीमत 8.61 लाख थी। कुछ फ्लैट निर्माणाधीन हैं। भास्कर टीम मौके पर पहुंची तो साइट पर मौजूद इंजीनियर राहुल जैन से लोग शिकायतें कर रहे थे। खरीददार बनकर पड़ताल की गई तो उन्होंने टू बीएचके फ्लैट 16 लाख रुपए में देने की डील बताई। बिल्डर के बारे में पूछने पर कहा कि वह बाहर रहते हैं, दो साल से मैं खुद नहीं मिल पाया।


