आम आदमी पार्टी (AAP) ने शहरी डिवेल्पमेंट अथॉरिटीज के अध्यक्ष पद पर मुख्य सचिव की नियुक्ति पर विवाद गर्माता जा रहा है। भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल के नेताओं ने पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की जगह निर्वाचित नहीं बल्कि मुख्य सचिव को विकास प्राधिकरणों का अध्यक्ष बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना है कि अरविंद केजरीवाल अब पंजाब के असली मुख्यमंत्री बन चुके हैं, जबकि भगवंत मान मात्र एक ‘कठपुतली’ रह गए हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर बादल और कांग्रेस नेता खैहरा ने आरोप लगाया कि AAP सरकार ने जनता के जनादेश से धोखा किया है। उन्होंने मांग की कि भगवंत मान स्थिति स्पष्ट करें और पंजाब की सत्ता दिल्ली को सौंपने का जवाब दें। लेकिन अब आम आदमी पार्टी ने इस कदम को विकास कार्यों में तेजी लाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सशक्त करने के लिए उठाया कदम बताया है। विपक्ष की आरोपों पर सफाई AAP पंजाब अध्यक्ष और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि PRDPT एक्ट की धारा 29(3) में संशोधन मुख्यमंत्री के अधिकारों को कम करने के लिए नहीं, बल्कि केवल विकास कार्यों में देरी को समाप्त करने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा, “मुख्य सचिव प्रस्तावों को स्वीकृति देंगे, लेकिन अंतिम मंजूरी पंजाब अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (PUDA) और कैबिनेट से ही आएगी। खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान PUDA के चेयरमैन और कैबिनेट के प्रमुख हैं, ऐसे में उनके अधिकारों के कमजोर होने का सवाल ही नहीं उठता।” विपक्ष की आलोचना पर पलटवार शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने शिरोमणि अकाली दल पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने अपने शासनकाल में कई गड़बड़ियां कीं, अब वही आम आदमी पार्टी की जनहितकारी नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने इस कदम को विजनरी सुधार करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने दूरदर्शिता दिखाते हुए सभी शहरी विकास प्राधिकरणों की अध्यक्षता मुख्य सचिव को सौंपी, ताकि विकेन्द्रीकृत शासन व्यवस्था को मजबूती मिले और स्थानीय मुद्दों पर तेजी से फैसला लिया जा सके।


