भास्कर न्यूज | तमता पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत बालाझर के चिमटापानी में एक मोर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मोर बीते एक वर्ष से मुर्गियों के साथ गांव की गलियों में घूमता नजर आता है। ग्रामीणों के लिए यह दृश्य अब सामान्य हो गया है, लेकिन बाहर से आने वाले लोग हैरान रह जाते हैं। गांववालों के अनुसार, एक वर्ष पहले गांव के एक व्यक्ति को जंगल में मवेशी चराते समय तीन अंडे मिले थे। वह उन्हें घर ले आया और मुर्गियों के अंडों के साथ रख दिया। कुछ दिनों बाद मुर्गी ने अंडे से चूजे निकाले। उनमें से दो अंडे खराब हो गए, लेकिन एक अंडे से मोर का बच्चा निकला। तब से यह मोर मुर्गियों के साथ ही रह रहा है। वह उनके साथ ही घूमता है, उन्हीं के साथ दाना चुगता है और रात में भी उन्हीं के पास रहता है। ग्रामीणों ने कई बार उसे जंगल में छोड़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार वह मुर्गियों की आवाज सुनकर वापस गांव लौट आया। इस मामले की जानकारी पहले से वन विभाग को है। विभाग ने ग्रामीणों को साफ चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय पक्षी मोर को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। ऐसा होने पर संबंधित व्यक्ति को सजा और जेल का सामना करना पड़ सकता है। पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के रेंजर कृपा सिंधु पैकरा ने बताया कि यह मोर अब पूरी तरह पालतू हो चुका है और उसे जंगल में छोड़ना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह बाद इस मोर को अंबिकापुर स्थित पार्क में स्थानांतरित किया जाएगा। वहां की टीम को पहले ही सूचित कर दिया गया है। यदि मोर को परेशानी होती है, तो तुरंत वन विभाग को जानकारी देने कहा है। मुर्गियों के साथ रह रहा मोर।


