मुहाना मंडी में फेज-2 की लीज मनी का मामला एक बार फिर विवादों में है। समिति ने फेज-2 में अलॉट की गई 850 दुकानों के मालिकों को 31 मार्च तक अगले 20 साल की लीज जमा कराने के आदेश दिए हैं। इसमें लिखा है कि मुख्य मंडी प्रांगण टर्मिनल मार्केट मुहाना/गौण मंडी प्रांगण शाहपुरा व जनता मार्केट में 99 वर्षीय लीज के आधार पर आवंटन किया हुआ है। पट्टे की शर्त के अनुसार आवंटित भूखंड की आवंटन राशि का एक प्रतिशत के बराबर की वार्षिक लीज राशि हर वर्ष 31 मार्च को अग्रिम भुगतान किया जाना है। यह राशि 30 अप्रैल तक 15 प्रतिशत विलंब शुल्क के साथ जमा कराई जा सकती है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो बिना नोटिस भूखंड निरस्त कर दिया जाएगा। व्यापारी इसका विरोध कर रहे हैं। 2009 में फेज-2 की 850 दुकानों का आवंटन लॉटरी से हुआ था। कब्जा पत्र 2019 में दिया। 2022 तक खाली भूखंड पर निर्माण कराना जरूरी था, जो हो गया। तब साल 2009 से लेकर 2019 तक की लीज मनी समिति ने जमा करवा ली थी। अब समिति अगले 20 साल की लीज मांग रही है। फल-सब्जी संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष पप्पू लाल प्रजापति का कहना है कि जब फेज वन में व्यापारियों से लीज मनी कब्जा पत्र के दिन से ली गई थी तो हमसे लॉटरी के समय से क्यों मांग रही है, जबकि समिति अब तक फेज-2 का ट्रेड शिफ्ट नहीं कर पाई। जेडीए और हाउसिंग बोर्ड भी लीज मनी कब्जा पत्र के आधार पर ही लेते हैं। साल 2020 में तत्कालीन डायरेक्टर ने लीज मनी के मुद्दे पर आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। मंडी में दो तरह के नियम मंडी आवंटन नोटिस से लीज मनी मांग रही है, जबकि ये लीज मनी कब्जा पत्र से ली जानी थी। सभी व्यापारियों ने आवंटन पत्र से 10 साल की लीज मनी जमा करा दी। अब समिति कब्जा पत्र से पुन: लीज मनी मांग रही है। फेज-1 में कब्जा पत्र के आधार पर वन टाइम लीज मनी 10 साल की वसूल की गई थी। फेज-2 में 20 साल की वसूली मांग रहे हैं।


