मेगा प्लान:सीएस ने चार विभागों से 10 साल का रोड सेफ्टी प्लान मांगा, ब्लैक स्पॉट खत्म करेंगे

राजस्थान के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने जॉइन करने के 10 दिन के अंदर प्रदेश के लिए 10 साल आगे के प्लान बनाने शुरू कर दिए हैं। सीएस का कार्यकाल भी 10 माह से कम बचा है, फिर भी वे प्रदेश के रोड एक्सीडेंट और मौतों के आंकड़े प्रथम चरण में ही आधे करने पर काम कर रहे। वे एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस आधारित (आईरेड) पर बड़ा प्लान बनवा रहे हैं। 2024 में राजस्थान में करीब 24075 एक्सीडेंट हुए और 11762 लोगों की जान गई। सीएस श्रीनिवास ने अलग से अफसरों की एक विशेषज्ञ कमेटी बना कर 10 साल यानी 2035 तक के रोड सेफ्टी का ब्लू प्रिंट मांगा है। सीएस का रोड सेफ्टी प्लान व्यापक है। इसका मुख्य उद्देश्य 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करना है। श्रीनिवास ने सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी परिवहन, पुलिस, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी के बीच प्रभावी समन्वय कर यह प्लान बनवाना शुरू किया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों हाईवे पर बसों के भीषण अग्निकांड में गंभीर घायल हुए लोगों से सीएस मिले थे। सबसे पहले हटेंगे ढाबे व आवारा पशु
प्रदेश में एक्सीडेंट में मौतों की सबसे बड़ी वजह नशे में ड्राइनिंग, रोड के दोनों तरफ अतिक्रमण, आवारा पशु और मीडियन कट आदि माने गए हैं। सीएस ने चार विभागों से इसका एकीकृत प्लान बनाकर इस पर काम करने को कहा है। मीडियन कट और आवारा पशु सबसे पहले हटाने और नशे में कोई ड्राइव न कर सके, इसके सख्त नियम लागू होंगे। 10-वर्षीय कार्य योजना: 3 चरण का बना रहे प्लान रोड सेफ्टी की 10-वर्षीय कार्य योजना तैयार करवाई जा रही। राजस्थान इस तरह की 10 वर्षीय कार्य योजना अपनाने वाला देश का पहला राज्य है, जिसे तीन चरणों में लागू किया जा रहा है। पहला चरण 2025-2027 तक चलेगा, जिसमें संस्थागत मजबूती और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दूसरा चरण 2028-2030 तक चलेगा, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के ‘सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई का दूसरा दशक’ के अनुरूप सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत कम की जाएगी। तीसरा चरण 2031-2035 तक चलेगा, इसमें दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 75 प्रतिशत तक कम करने का प्लान है। कैसे करेंगे एक्सीडेंट और मौतें आधी
सीएस के अनुसार एक्सीडेंट कम करने के लिए आईटी और एआई का प्रयोग होगा। सड़क दुर्घटनाओं के ऑनलाइन डेटा प्रविष्टि के लिए एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (आईरेड) एप्लिकेशन लागू किया जा रहा है। हर ब्लैक स्पाट के पास 24 घंटे एंबुलेंस की व्यवस्था होगी। घायलों के लिए केशलैस ट्रीटमेंट स्कीम आएगी। जंक्शन पर जीओ फेंसिंग होगी। सड़क सुरक्षा नियमों और प्रावधानों के बारे में जागरूकता पैदा करने और व्यवहार में बदलाव लाने के लिए अभियान चलाए जाएंगे। दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए राज्य के 40 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को प्राथमिक ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित करेंगे। हाइवे पेट्रोलिंग (गश्त) 4 गुना की जाएगी। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को 10 मिनट से कम समय में हटाएंगे। गति सीमा की जांच तगड़ी होगी। पीडितों को तत्काल सहायता के इंतजाम होंगे। ऐसे बढ़ाएंगे ट्रॉमा केयर सेंटर हाल ही में फलोदी में हुए एक बड़े हादसे के बाद, मुख्य सचिव ने जयपुर के एसएमएस अस्पताल और अन्य सरकारी अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर का निरीक्षण किया और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने का निर्देश दिया। इसके तहत राज्य सरकार एक नई, व्यापक ट्रॉमा केयर नीति तैयार कर रही है। इस योजना के तहत, सभी लेवल-1 और लेवल-2 ट्रॉमा सेंटर को “मिशन मोड’ में अपग्रेड किया जाएगा।

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