मेडिकल कॉलेज में स्टूडेंट्स को परोसा जा रहा था जंक-फूड:जयपुर से आई जांच टीम ने संचालक को फटकार लगाई, बीडीके हॉस्पिटल का निरीक्षण किया

चिकित्सा शिक्षा विभाग की टीम ने झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज का दो दिनों तक निरीक्षण किया। टीम ने फायर सेफ्टी, बिजली, निर्माण कार्यों और सबसे महत्वपूर्ण, खाद्य गुणवत्ता सहित विभिन्न पहलुओं पर गहन जांच की। इस दौरान बीडीके अस्पताल में आयोजित सफल मॉक ड्रिल और सफाई की सराहना हुई, वहीं निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज की धीमी प्रगति और मेडिकल कॉलेज मैस में घटिया खान-पान पर सख्त नाराजगी भी जताई। इस बीच मंगलवार की शाम बीडीके अस्पताल में आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एक फायर मॉक ड्रिल की गई। आग लगने की काल्पनिक सूचना पर पुलिस, प्रशासन, नगरपरिषद, विद्युत विभाग, पीडब्ल्यूडी और अग्निशमन दल ने तुरंत मौके पर पहुंचे। अतिरिक्त निदेशक (अस्पताल प्रशासन) मुकेश मीणा ने एमसीएच विंग के पास निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आग बुझाने, घायलों को आपातकालीन इकाई में शिफ्ट करने और आईसीयू व वार्ड में भर्ती करने की पूरी प्रक्रिया का जायजा लिया। उन्होंने सभी विभागों की तत्परता और प्रभावी टीमवर्क की सराहना करते हुए कहा कि यह आपदा प्रबंधन को मजबूत करने का स्पष्ट संकेत है। टीम ने अस्पताल प्रशासन को प्रतिमाह मॉक ड्रिल और कमियों की पहचान (गैप एनालिसिस) अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए। सफाई और बायो मेडिकल वेस्ट पर दिए निर्देश
निरीक्षण के दौरान टीम ने बिजली आपूर्ति, वायरिंग, पावर बैकअप और आपातकालीन व्यवस्थाओं की गहन जानकारी ली। तकनीकी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पीडब्ल्यूडी चौकी का हेल्पलाइन नंबर जारी करने को कहा गया। सफाई और कचरा प्रबंधन टीम ने अस्पताल की सफाई और बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट की सराहना करते हुए नियमित मॉनिटरिंग टीमें बनाने को कहा। इसके साथ ही टूटी सड़क की मरम्मत और पेचवर्क के लिए आरएसआरडीसी को निर्देश दिए गए। इनके अलावा प्रसव और नवजात इकाई (MCH Wing) की सेवाओं की सराहना करते हुए निर्माणाधीन ट्रॉमा सेंटर को तेजी से पूरा करने के भी निर्देश दिए। वहीं आवारा पशुओं और कुत्तों की रोकथाम, ओपीडी-आईपीडी सेवाओं में सुधार, दवा योजना भवन का प्रस्ताव तैयार करने और कबाड़ निस्तारण के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। नर्सिंग कॉलेज के निर्माण में देरी पर कड़ी नाराजगी
टीम ने निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज का निरीक्षण किया। निर्माण कार्य की धीमी गति पर अतिरिक्त निदेशक ने गंभीर नाराजगी जताई। एक्सईएन सीमा मरोड़िया को लेबर संख्या बढ़ाने और निर्माण की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए। लेक्चर हॉल और कार्यालय भवन में विद्युत कार्य शीघ्र पूरा करने के लिए एडिशनल इंजीनियर रवि को निर्देशित किया गया। इसके साथ ही, गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण देरी से शुरू होने पर भी आपत्ति व्यक्त की गई। मैस में जंक फूड और घटिया खाने पर कड़ी फटकार
मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के दौरान छात्रों की शिकायत पर टीम ने कॉलेज मैस का दौरा किया। छात्रों ने दूध, दही और छाछ की खराब गुणवत्ता की शिकायत की, जिसे अतिरिक्त निदेशक मुकेश मीणा ने मौके पर छाछ चखकर सही पाया। उन्होंने छाछ की खट्टी गंध और खराब गुणवत्ता की पुष्टि करते हुए मैस संचालक को जमकर फटकार लगाई। पुरानी छाछ का उपयोग तुरंत बंद करने और दूध उत्पादों की लैब सैंपलिंग कराने के निर्देश दिए गए। इतना ही नहीं, मैस परिसर में जंक फूड की बिक्री देखकर भी टीम नाराज हुई और संचालक को इसे तुरंत बंद करने को कहा। मीणा ने छात्रों को शुद्ध भोजन लेने की सलाह दी और किसी भी समस्या की जानकारी सीधे देने के लिए अपना मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराया। सात दिन बाद मैस की स्थिति पुनः जांची जाएगी। मेडिकल कॉलेज परिसर में जलभराव समस्या पर भी तल्खी
मेडिकल कॉलेज निरीक्षण के दौरान परिसर में पानी भराव (जलभराव) की समस्या पर भी अतिरिक्त निदेशक ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने प्रिंसिपल डॉ. राकेश साबू को जिला कलेक्टर और राजमेस से समन्वय कर जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने को कहा। उन्होंने पिछली बैठक के मिनट्स तैयार कर जारी करने और छात्रों की थ्योरी व प्रैक्टिकल कक्षाओं को नियमित करने के भी निर्देश दिए। इस दौरान निरीक्षण टीम में अतिरिक्त निदेशक मुकेश मीणा और स्वास्थ्य प्रबंधक ज्योति मीणा के साथ प्रधानाचार्य डॉ राकेश साबू, पीएमओ डॉ जितेन्द्र भाम्बू, अतिरिक्त प्रधानाचार्य डॉ दीपक तंवर, नर्सिंग प्रधानाचार्य आबिदा खान, आर एम ओ डॉ सिद्धार्थ शर्मा, स्वास्थ्य प्रबंधक नावेद अख्तर, एक्स ई एन सीमा मरोडिया, एक्स ई एन रवि और कनिष्ठ अभियंता विनोद यादव मौजूद रहें।

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