मेडिकल लापरवाही की शिकायत लेकर शहर के एक शिक्षाविद महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक न तो जांच पूरी हो सकी है और न ही उन्हें जवाब मिल पाया है। जिला प्रशासन के निर्देशों के बावजूद मेडिकल जांच लंबित है। इसे लेकर मंगलवार को उन्होंने जनसुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा को शिकायत की है। मामला सरकारी होलकर साइंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. शंकरलाल गर्ग के परिवार का है। उन्होंने बताया कि जून 2019 में मदरहुड हॉस्पिटल में पोती अबिरा का जन्म हुआ था। उस दौरान इलाज डॉ. नीरजा पुराणिक द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि डिलीवरी के दौरान ऑक्सीजन नहीं मिलने से पोती को एस्फिक्सिया नामक गंभीर बीमारी हो गई। इसमें डॉ. पुराणिक और अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही रही। न वह खा सकती न बोल सकती., न उठ सकती है और न ही बैठ सकती है। छह साल से उसकी वैसी ही हालत है। उन्होंने डेढ़ साल पहले कलेक्टर को कहा था कि जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाया जाए ताकि क्रिमिनल केस भी दायर तक सके। 15 माह हो चुके हैं लेकिन मेडिकल ऑफिसर ने हमें रिपोर्ट नहीं दी है। स्वास्थ्य विभाग अब तक जांच पूरी नहीं कर सका है। वे 9 करोड़ के हर्जाने के लिए सिविल कोर्ट भी दायर कर चुके हैं। डॉ. गर्ग ने आरोप लगाया कि जांच को जानबूझकर टालने के लिए इसे अनावश्यक रूप से मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। जांच को मेडिकल कॉलेज भेजने की कोई जरूरत नहीं थी। इससे प्रक्रिया लंबी हो गई है और कोई गति नहीं है। जांच लंबित होने के कारण हम आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। शिकायत में उन्होंने डॉ. नीरजा पौराणिक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। डॉ. गर्ग का कहना है कि डिलीवरी के दौरान मानक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते नवजात कोगंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा और उसे स्थायी न्यूरोलॉजिकल समस्या हो गई। उधर, पता चला है जांच के दौरान डॉ. नीरजा पौराणिक ने मेडिकल बोर्ड के समक्ष अपना बयान दर्ज नहीं कराया। मामले में ‘दैनिक भास्कर’ ने उनसे बात की तो उनका बताया कि 2021 से यह मामला कोर्ट में चल रहा है। इसमें डॉ. गर्ग खुद क्रॉस एक्जामिनेशन के लिए कोर्ट नहीं आए हैं। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने बताया कि मेडिकल कॉलेज को जांच पूरी करने के लिए तीन नोटिस भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है। कलेक्टर ने डॉ. गर्ग को शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया है।


