सतना में नगर निगम में प्रशासनिक अराजकता को लेकर बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक के दौरान महापौर योगेश ताम्रकार इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने बैठक बीच में ही स्थगित कर दी और अपने चेंबर में चले गए। एमआईसी के इतिहास में यह पहला मौका है, जब महापौर ने स्वयं बैठक रोक दी। दोपहर करीब 4 बजे शुरू हुई एमआईसी बैठक में 13 प्रस्तावों पर चर्चा प्रस्तावित थी। सचिव अशोक केवट करीब डेढ़ घंटे तक प्रस्तावों का विवरण पढ़ते रहे। इसी दौरान महापौर ने पिछली चार एमआईसी बैठकों के निर्णयों और आदेशों के पालन प्रतिवेदन मांगे। सचिव के पास कोई जवाब नहीं था। इस पर महापौर भड़क गए और कहा कि जब एमआईसी के फैसलों पर अमल ही नहीं हो रहा, तो ऐसी बैठकों का औचित्य क्या है। बैठक स्थगित कर चेंबर पहुंचे, सदस्यों ने किया बहिष्कार नाराज महापौर ने बैठक स्थगित करने की घोषणा की और अपने चेंबर में चले गए। उनके साथ एमआईसी के सभी सदस्य भी बैठक छोड़कर बाहर आ गए। इस कारण 13 सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा नहीं हो सकी। मेयर को मनाने चेंबर पहुंचे निगमायुक्त सूत्रों के अनुसार, बैठक स्थगित होने के बाद निगमायुक्त शेर सिंह मीना महापौर के चेंबर पहुंचे। दोनों के बीच करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा हुई। चर्चा के दौरान महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो वे इस्तीफा देने पर भी विचार कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में मेयर और निगमायुक्त से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। 31 दिसंबर तक सुधार नहीं हुआ तो अनशन एमआईसी सदस्य अभिषेक तिवारी अंशू ने चेतावनी दी कि यदि 31 दिसंबर तक नगर निगम की अराजक स्थिति पर लगाम नहीं लगी, तो वे 1 जनवरी से निगम कार्यालय के सामने अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि गंभीर भ्रष्टाचार मामलों में न तो जांच हो रही है और न ही कार्रवाई। अभिषेक तिवारी ने बताया कि वार्ड क्रमांक 4 में 35 लाख रुपए की लागत से बनी सड़क छह महीने में ही टूट गई। बाल किशन वाटिका में अवैध कब्जा हटाया नहीं गया। मांस मंडियों को तय स्थानों पर शिफ्ट नहीं किया गया है। करोड़ों की लागत से लगे सोलर पैनल बंद पड़े हैं, लेकिन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही। बैठक में ये रहे मौजूद एमआईसी बैठक में सदस्य गोपी गेलानी, रानी शुक्ला, आदित्य यादव, अभिषेक तिवारी, पीके जैन, डोली वाल्मीकि, डिप्टी कमिश्नर सत्यम मिश्रा, अधीक्षण यंत्री एसके सिंह और कार्यपालन यंत्री आरपी सिंह मौजूद थे।


