‘मेरे भतीजे के शव के अंग निकाले’:SMS अस्पताल अधीक्षक ने नकारे आरोप, एक ने कहा- ऑक्सीजन नहीं मिलने से भाई ने हाथों में दम तोड़ा

बिना हमारी अनुमति के मॉर्च्युरी में मेरे भतीजे के शरीर के अंग निकाले जा रहे थे। विरोध किया तो हमें समझाने लगे कि इससे आपको फायदा मिलेगा और प्रशासन आपकी सहायता करेगा। मैंने बेड के नट बोल्ट खोलने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुले। मेरा भी दम घुटने लगा। न चाहते हुए भी मुझे वार्ड से बाहर आना पड़ा। लौटा तब तक उनकी मौत हो गई थी। ये आरोप और दर्द उन परिजनों के हैं, जिन्होंने अपनों को खो दिया। जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में 5 अक्टूबर की देर रात आग लग गई थी। 8 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 3 महिलाएं शामिल हैं। हादसे में अपनों को खोने वालों का आरोप है कि न तो अस्पताल के गार्ड और मेडिकल स्टाफ ने बचाने की कोशिश की न ही उन्हें मदद के लिए अंदर जाने दिया गया। भास्कर से बातचीत में उन्होंने पीड़ा बताई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… एक्सीडेंट के बाद ट्रॉमा लाए, हालत सुधरी तो अव्यवस्था ने दम घोंट दिया
सवाई माधोपुर के बौली तहसील में गाय से बाइक टकरा जाने से घायल दिगम्बर वर्मा (37) को 4 अक्टूबर को एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया था। दिगम्बर के छोटे भाई कैलाश वर्मा ने बताया कि जैसे–तैसे इलाज मिला और हालत में सुधार होने लगा। 5 अक्टूबर की रात करीब 11.30 बजे वार्ड में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जब आग लगी और भगदड़ मची तो हमने वार्ड में मौजूद स्टाफ से मदद मांगी। मदद करने की बजाय वो लोग भाग गए। जैसे-तैसे हमने दिगम्बर को बाहर निकालने की कोशिश की। लाइफ सपोर्ट पर होने के कारण उन्हें ऐसे ही नहीं बाहर ला सकते थे। मैं भागकर नीचे गया। ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए दो घंटे तक यहां वहां भटकता रहा। किसी ने न तो मदद की न ही किसी ने बताया कि कहां जाना है। वापस भागकर वार्ड में गया तो हमें अंदर नहीं जाने दिया गया। बड़ी मिन्नतों के बाद अंदर से दिगम्बर को जैसे-तैसे लेकर बाहर आए। उसका चेहरा काला पड़ गया था। सांस नहीं ले पा रहा था। हम दो मंजिल से उतारकर उसे वापस लाए। ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण मेरे भाई ने मेरे हाथों में तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। काका का आराेप- शव देने में भी देरी की
दिगम्बर के काका मूलचंद गुस्से में आरोप लगाते हुए बोले कि बिना हमारी अनुमति के मॉर्च्युरी में दिगम्बर के शरीर के महत्वपूर्ण अंग निकाले जा रहे हैं। हमसे कहा गया था कि बस एक चीरा लगाकर शव आपको सौंप देंगे। सुबह से बैठा रखा है। न शव दे रहे हैं न ही बता रहे हैं कि कब तक देंगे। अंग निकालने का विरोध किया तो हमें समझाने लगे कि इससे आपको फायदा मिलेगा और प्रशासन आपकी सहायता करेगा। दिगम्बर वर्मा के भाई कैलाश चंद का कहना है कि हमें 10 मिनट का समय बताया गया था लेकिन कई घंटों तक बैठा कर रखा। शव देने में भी देर करते रहे। ऐसे में हमें अंदेशा है कि भाई के शरीर से अंग निकाले गए हैं। एसएमएस अस्पताल के कार्यवाहक सुप्रीटेंडेंट डॉ. सुशील भाटी का कहना है कि परिजनों की अनुमति और कागजी प्रक्रिया पूरी किए बिना अंग निकाल ही नहीं सकते। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया में समय लगता है। परिवार के आरोप बेबुनियाद हैं। इसी सप्ताह बिना अनुमति बच्चे की आंख निकाले जाने का मामला भी सामने आ चुका है। दो साल पहले परिवार की अनुमति के बिना बच्चे की आंखें निकाल ली गई थीं। जिसकी शिकायत परिवार ने अब दर्ज कराई है। नट बोल्ट खोल बाहर निकालने की कोशिश की, लापरवाही ने ले ली 6 जानें
सांगानेर (जयपुर) के कपूरा वाला गांव की धानका की ढाणी के रहने वाले बहादुर धानका (35) 29 सितंबर को घर में सीढ़ियों से फिसलकर गिर गए थे। सिर में चोट के कारण 30 सितंबर को गंभीर हालत में सांगानेर के प्राइवेट हॉस्पिटल से एसएमएस के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। 2 अक्टूबर को उनके सिर का क्रिटिकल ऑपरेशन किया गया था। उन्हें इस दौरान वार्ड 202 में बेड नंबर 11 पर रखा गया था। उनके बड़े भाई के दामाद अंकित बताते हैं कि रात सवा 11 बजे के करीब 7 नंबर बेड के पेशेंट के ऊपर लगे एसी में धुआं निकलते देखा। अटेंडेंट ने वार्ड स्टाफ को इसकी जानकारी दी। चाबी लेकर पैनल रूम खुलवाकर चेक करने को कहा। स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया। दूसरी बार भी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया तो अटेंडेंट ने कहा कि मामला गंभीर है। चाबी आने में समय लग रहा है तो ताला तोड़ दो। इस पर कंपाउंडर और नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि इमरजेंसी से चाबी मंगवाई है, आ रही है। इसके बाद आग ने किसी को संभलने का मौका नहीं दिया। पूरे वार्ड में धुआं छा गया। अंकित बताते हैं कि मैंने उन्हें बचाने के लिए मेडिकल स्टाफ से मदद मांगी। कहा कि कम से कम बेड के लॉक को तो खोल दो, ताकि मैं इन्हें बाहर निकाल सकूं, लेकिन स्टाफ भाग गया। मैंने बेड के नट बोल्ट खोलने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुले। मेरा भी दम घुटने लगा। न चाहते हुए भी मुझे वार्ड से बाहर आना पड़ा। उस वक्त तक उनकी सांसें चल रही थीं। पुलिस और दमकलकर्मियों के आने के बाद मैं करीब आधे घंटे बाद दोबारा ऊपर गया। वार्ड में जाने लगा तो मुझे रोक दिया गया। आग बुझने के बाद डॉक्टर से फोटो वीडियो दिखाकर पूछा कि हमारे पेशेंट कहां हैं? उन्होंने बताया कि एसएमएस के बांगड़ में जोन में 112 नंबर कमरे में। हम वहां गए। वहां पहुंचे तो मौजूद स्टाफ बोला कि उन्हें वापस ट्रॉमा में भेज दिया है। जब बहादुरजी को देखा तो उनकी ऑक्सीजन की पाइप हटी हुई थी। शरीर ठंडा पड़ गया था। परिवार में बूढ़ी मां, पत्नी और दो मासूम बच्चे
बहादुर के परिवार में उनकी बूढ़ी मां सरजू देवी ( 70), पत्नी नीलू देवी (30), बेटा कुणाल (10) और बेटी गौरी (6) है। पिता बिरधीचंद की 2020 में कोरोना से मौत हो गई थी। परिवार की जिम्मेदारी बहादुर पर ही थी। बहादुर बेलदारी करते थे। बेटे कुणाल को पुलिस की वर्दी में देखना चाहते थे। कुणाल ने भास्कर को बताया- पिता ने जो सपना देखा था, उसे पूरा करने की कोशिश करूंगा। बेटी गौरी को हादसे के बारे में पता तो है, लेकिन समझ नहीं पा रही कि उसकी दुनिया उजड़ गई है। मां सरजू देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। पत्नी नीलू देवी गुमसुम हो गई हैं। भतीजे मुकेश ने बताया कि हॉस्पिटल के स्टाफ और गार्ड ने कोई मदद नहीं की। पुलिसकर्मियों ने जान पर खेलकर दरवाजा तोड़ा और लोगों को बाहर निकाला। फायर फाइटिंग सिस्टम काम नहीं कर रहे थे
अंकित ने बताया कि वार्ड में एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं था। बेबस स्टाफ दमकल के आने का इंतजार कर रहा था। दूसरे वार्ड से एक अग्निशमन यंत्र लाए, लेकिन वो काम नहीं कर रहा था। फायर फाइटिंग सिस्टम भी चालू नहीं थे। वार्ड के अंदर इमरजेंसी में आग बुझाने के लिए छतों पर लगने वाले स्प्रिंकल भी नहीं थे। यही वजह आग को तेजी से फैलने का कारण बनी। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीते ढाई साल से स्टेरलाइजेशन मशीन भी खराब पड़ी है। ढाई साल में कई बार इसकी शिकायत कर चुके, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। —- SMS हॉस्पिटल अग्निकांड की ये खबरें भी पढ़िए… 1. जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग, 8 मरीजों की मौत:ट्रॉमा सेंटर के ICU में देर रात हुआ हादसा, शॉर्ट सर्किट होने का अनुमान 2. जयपुर के SMS अस्पताल में 8 मौतों के 9 जिम्मेदार:मंत्री-सचिव से लेकर इंजीनियर-ICU इंचार्ज की अनदेखी पड़ी भारी, मरीजों ने जान देकर चुकाई कीमत 3. परिजनों का दावा – जलते मरीजों को छोड़कर भागा स्टाफ:20 मिनट पहले ही बताया था आग लगी; किसी का मुंह जला, किसी ने दम घुटने से तोड़ा दम 4. ‘पैरों में कांच चुभ गए, पत्नी को नहीं बचा सका’:SMS अस्पताल में आग के बीच अपनों को बचाने घुसे थे लोग,बोले- कंपाउंडर गेट बंद कर निकला 5. जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग भड़कने के 3 कारण:वार्ड में जहां बेड लगने थे, कबाड़ भर दिया; स्मॉक डिटेक्टर ने काम नहीं किया 6. SMS में आग से 8 की मौत का एनिमेशन VIDEO:आईसीयू में धुआं भरने से मरीजों का दम घुटा, परिजन बचाने की कोशिश करते रहे 7. SMS अग्निकांड में 16 से ज्यादा मरीजों को बचाया:चिल्लाने की आवाज सुनकर दौड़े, खिड़कियों के कांच तोड़े; मरीजों को उठाकर बाहर निकाला 8. 8 जान लेने वाली SMS-अस्पताल की आग 13 तस्वीरों में:ICU के मरीजों को सड़क पर रखना पड़ा, खुद परिजन लेकर भागे; मंत्री पर भड़के

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